How Alcohol Affects Your Liver In Hindi : लिवर हमारे शरीर के सबसे अहम अंगों में से एक है। शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लिवर का स्वस्थ रहना बहुत जरुरी होता है, क्योंकि ये हमारे शरीर के लिए फिल्टर का काम करता है। लिवर को नुकसान पहुंचाने वाले कई कारणों में शराब भी एक महत्वपूर्ण कारण मानी जाती है। शराब आपके लिवर को कई तरीकों से नुकसान पहुँचा सकती है और इसके परिणामस्वरूप फैटी लीवर, हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।
जब लिवर शराब को पचाता है, तो इस प्रक्रिया में कुछ लिवर की कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं। यदि लंबे समय तक अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन किया जाए, तो लिवर की कोशिकाओं के पुनर्जनन की क्षमता कम हो जाती है। इसका परिणाम यह होता है, कि लिवर को स्थायी क्षति पहुँच सकती है और उसकी कार्यक्षमता पर गहरा असर पड़ सकता है।
क्या शराब लिवर के लिए नुकसानदायक है ? (Shocking Signs Your Liver is Damaged by Alcohol)
लिवर मानव शरीर का एक अत्यंत जटिल अंग है, जो 500 से अधिक महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम देता है। इसके मुख्य कार्यों में रक्त से विषाक्त पदार्थों को छानना, ऊर्जा का भंडारण करना, हार्मोन और प्रोटीन का निर्माण करना तथा कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा को नियंत्रित करना शामिल है। जब शराब लिवर में टूटती है, तो इसके परिणामस्वरूप कई हानिकारक उप-उत्पाद उत्पन्न होते हैं, जिनमें एसीटैल्डिहाइड और फ्री रेडिकल्स प्रमुख हैं।
सही मायनों में शराब से अधिक ये उप-उत्पाद लिवर की कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त करते हैं और शराब से प्रेरित लिवर रोगों में मुख्य भूमिका निभाते हैं। ऐसे में हर बार जब लिवर शराब को छानता है, तो उसकी कुछ कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं। यद्यपि लिवर में खुद को पुनर्जीवित करने की क्षमता होती है, लेकिन लंबे समय तक और अत्यधिक शराब सेवन से यह क्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है। इसका परिणाम ये होता है, कि लिवर को स्थायी नुकसान हो सकता है, जिससे फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर फेलियर जैसी गंभीर स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
शराब लिवर को कैसे नुकसान पहुंचाती है ? (How Alcohol Affects Your Liver)
शराब हमारे लिवर पर कई नकारात्मक तरीकों से असर डालती है। जिसके कुछ मुख्य उदाहरण इस प्रकार हैं।
फैटी लिवर
फैटी लिवर शराब से होने वाली लिवर क्षति का सबसे प्रारंभिक चरण है। जब कोई व्यक्ति बहुत अधिक शराब पीता है, तो लिवर को शराब को तोड़ने में अत्यधिक मेहनत करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया के दौरान वसा का मेटाबॉलिज़्म प्रभावित होता है और लिवर की कोशिकाओं में वसा जमा होने लगती है। इसे ही फैटी लिवर रोग कहा जाता है।
यह स्थिति शुरू में अक्सर लक्षण नहीं दिखाती, इसलिए कई लोगों को इसका पता ही नहीं चलता। अच्छी बात यह है, कि यह एक ठीक होने वाली अवस्था है। इसका मतलब है, कि अगर समय रहते शराब का सेवन बंद कर दिया जाए, स्वस्थ आहार लिया जाए, वजन नियंत्रित रखा जाए और नियमित व्यायाम किया जाए, तो फैटी लिवर की समस्या ठीक भी हो सकती है।
सिरोसिस
सिरोसिस शराब से होने वाली लिवर क्षति का अंतिम और सबसे गंभीर चरण है। जब लंबे समय तक शराब का सेवन किया जाता है, तो लिवर बार-बार होने वाली सूजन और क्षति से खुद को ठीक करने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया में लिवर की स्वस्थ कोशिकाओं की जगह निशान ऊतक बन जाता है। धीरे-धीरे यह निशान इतना बढ़ जाता है, कि लिवर की सामान्य संरचना और कार्य क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो जाती है।
सिरोसिस के कारण लिवर ठीक से खून को फ़िल्टर करना, पित्त का उत्पादन करना और शरीर से विषैले पदार्थों को निकालना बंद कर देता है। इसके परिणामस्वरूप कई गंभीर जटिलताएँ हो सकती हैं, जैसे लिवर फेलियर, रक्तस्राव, पेट में पानी भरना, हाथ व पैरों में सूजन। कई मामलों में सिरोसिस इतनी गंभीर अवस्था तक पहुँच सकता है, कि रोगी का जीवन बचाने के लिए लीवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प रह जाता है।
लिवर में सूजन
लिवर की सूजन जिसे एल्कोहॉलिक हेपेटाइटिस भी कहा जाता है। यह अत्यधिक और लंबे समय तक शराब पीने का एक गंभीर परिणाम है। इस अवस्था में लगातार शराब सेवन से लिवर की कोशिकाओं में सूजन और क्षति होने लगती है। यह स्थिति शुरुआत में सामान्य लग सकती है, लेकिन धीरे-धीरे ये कई गंभीर रुपों में सामने आती हैं।
समय रहते इस पर ध्यान न देने पर ये कई भंयकर लक्षणों के साथ शरीर को नुकसान पहुंचाती है। इन लक्षणों में बुखार, मतली, भूख न लगना, त्वचा व आँखों का पीला पङ जाना और पेट में दर्द या सूजन होना जैसे लक्षण शामिल हैं। साथ ही ये भी जान लें, कि अगर एल्कोहॉलिक हेपेटाइटिस का सही समय पर इलाज और प्रबंधन न किया जाए, तो यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है और आगे चलकर सिरोसिस या लिवर फेलियर तक पहुँच सकती है।
लिवर कैंसर
अत्यधिक और लंबे समय तक शराब पीने से लिवर की कोशिकाओं को बार-बार नुकसान पहुँचता है। यह लगातार क्षति फैटी लीवर फिर एल्कोहॉलिक हेपेटाइटिस और उसके बाद सिरोसिस जैसे चरणों से होकर गुजर सकती है। जब लिवर में बार-बार सूजन और निशान बनते हैं, तो कोशिकाएँ असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से, सिरोसिस से पीड़ित लोगों में लिवर कैंसर का जोखिम सबसे अधिक होता है। इसके लक्षणों में तेज़ वजन कम होना, भूख में कमी, पीलिया, पेट में दर्द या सूजन, और अत्यधिक थकान शामिल हो सकते हैं।
लिवर फेलियर
सिरोसिस का सबसे गंभीर परिणाम लिवर फेलियर हो सकता है। इस स्थिति में लिवर अपनी सामान्य कार्यक्षमता जैसे कि खून को फ़िल्टर करना, पाचन में मदद करना और ज़रूरी प्रोटीन बनाना बंद कर देता है। जब लिवर फेल हो जाता है, तो शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं, खून का थक्का जमने की क्षमता कम हो जाती है, और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
इसके लक्षणों में गंभीर थकान, पीलिया, मानसिक भ्रम, पेट में तरल भरना और अत्यधिक रक्तस्राव शामिल हो सकते हैं। यह एक जानलेवा स्थिति है और अक्सर मरीज की जान बचाने के लिए लिवर ट्रांसप्लांट ही अंतिम विकल्प होता है।
लिवर स्टेटोसिस
लिवर स्टेटोसिस को अल्कोहॉल संबंधी लिवर स्टेटोसिस के नाम से भी जाना जाता है। यह स्थिति तब होती है, जब लंबे समय तक अत्यधिक शराब पीने के कारण लिवर की कोशिकाओं में वसा जमा हो जाती है। ये लिवर में होने वाली एक तरह की सूजन होती है। इस स्थिति में वसा का अत्यधिक जमाव लिवर में सूजन पैदा कर सकता है, जिसे स्टेटोहेपेटाइटिस भी कहते हैं। अगर इस अवस्था का समय पर उपचार नहीं किया गया और शराब का सेवन जारी रखा गया, तो यह धीरे-धीरे गंभीर यकृत क्षति और अंत में सिरोसिस का कारण बन सकती है।
क्या लिवर खुद को ठीक करने की क्षमता रखता है ?
लिवर का स्वस्थ होना शरीर के लिए बहुत जरुरी है, ये हम सभी जानते हैं। इसके बावजूद भी कई बार कुछ कारणों से लिवर की कोशिकाओं को नुकसान होता है और हम लिवर से जुङी किसी भी बीमारी का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में हमारे लिए ये भी जानना जरुरी होता है, कि लिवर खुद को ठीक करने की अद्भुत क्षमता रखता है। आपको सुनकर थोङा अजीब लगेगा, लेकिन ये सच है। लिवर शरीर का एकमात्र ऐसा अंग है, जो क्षतिग्रस्त होने के बाद भी स्वस्थ कोशिकाओं का पुनर्निर्माण कर सकता है।
जब लिवर की कोशिकाएँ मरती हैं, तो नई कोशिकाएँ उनकी जगह लेने लगती हैं और धीरे-धीरे लिवर सामान्य रूप से काम करने लगता है। हालांकि अगर क्षति बार-बार होती रहे या बहुत गंभीर हो जाए। उदाहरण के लिए लंबे समय तक अत्यधिक शराब पीने, हेपेटाइटिस संक्रमण या सिरोसिस जैसी स्थितियों होने पर लिवर की यह क्षमता कम हो जाती है। ऐसी अवस्था में स्थायी क्षति हो सकती है, जिसे ठीक करना संभव नहीं होता। इसके अलावा लिवर अंतिम क्षण तक खद को ठीक करने की पूरी कोशिश करता है, जब तक वह पूरी तरह हार नहीं जाता या उसकी कोशिकाएं नष्ट नहीं हो जाती।
शराब से लिवर को होने वाले नुकसान से कैसे बचें ?
अगर आप जानते हैं, कि शराब आपके लिवर को नुकसान पहुंचा रही है, तो कुछ जरुरी बातों का ध्यान रखकर और साथ ही कुछ आदतों को अपनाकर आप समय रहते अपने लिवर को बचा सकते हैं।
वजन कम करें
यदि आपका वजन अधिक है या आप मोटापे से ग्रस्त हैं, तो वजन कम करना लिवर के स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी हो सकता है। अतिरिक्त वसा खासकर पेट के आसपास जमा होती है, जो लिवर में वसा बढ़ाकर फैटी लिवर रोग का कारण बन सकती है। धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से वजन घटाने से लिवर पर जमा वसा कम हो जाती है और उसकी कार्यक्षमता बेहतर होती है।
दवाओं का सेवन सावधानी से करें
दवाओं का अत्यधिक सेवन आपके लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लिवर आपके शरीर में दवाओं को तोड़ने और उन्हें बाहर निकालने का काम करता है। इसके बाद कुछ दवाएं लिवर पर अधिक दबाव डाल सकती हैं और उसके लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं। ऐसे में जरुरी है, कि किसी भी दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और साथ ही उसकी मात्रा के बारे में भी उचित जानकारी होनी चाहिए। अधिक मात्रा आपके लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
नियमित व्यायाम करें
लिवर के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम बेहद ज़रूरी है। व्यायाम से शरीर में जमा अतिरिक्त वसा कम होती है और यह लिवर में वसा जमने के खतरे को घटाने में मदद करता है। साथ ही यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करता है और वजन को नियंत्रित रखने में सहायक होता है।
स्वस्थ आहार लें
लिवर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार बहुत ज़रूरी है। अपने खाने में अधिक से अधिक फल, सब्ज़ियां और साबुत अनाज शामिल करें। ये खाद्य पदार्थ विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो न केवल आपके लिवर को सही तरह से काम करने में मदद करते हैं बल्कि पूरे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी मज़बूत बनाते हैं।
स्वास्थ्य सेवा प्रदाता द्वारा मूल्यांकन
एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता सबसे पहले आपकी शारीरिक जाँच करेगा और आपके स्वास्थ्य इतिहास के बारे में विस्तार से पूछेगा। इस प्रक्रिया के दौरान वे आपसे शराब पीने की मात्रा और उससे जुङी अन्य बातों के बारे में पूछ सकते हैं। यह सवाल आपको असहज कर सकता है और कई बार लोग अपनी शराब पीने की आदतों के बारे में बताने में हिचकिचाते हैं, लेकिन यह जानकारी आपके प्रदाता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि केवल सही जानकारी मिलने पर ही वे आपके लिवर की स्थिति का सही निदान कर सकते हैं और उसके अनुसार उपचार की योजना बना सकते हैं।
व्यवहारिक उपचार
इसमें आप व्यसन परामर्शदाताओं या मनोवैज्ञानिकों के साथ काम करते हैं। वे आपको शराब पीने की आदत शुरु होने के कारण के बारे में बताते हैं और उस ओर ध्यान ले जाते हैं, ताकि आप उस वजह को समझ सकें। साथ ही वे आपको शराब को छोड़ने के लिए जरुरी व्यवहारिक बदलावों के बारे में भी समझाते हैं।इस प्रक्रिया में काउंसलिंग, कॉग्निटिव-बिहेवियरल थैरेपी (CBT), मोटिवेशनल थैरेपी और सपोर्ट ग्रुप्स शामिल हो सकते हैं।
दवाइयां
कुछ दवाइयाँ शराब पीने की इच्छा को कम करने या शराब के नशे का असर अप्रिय बनाने में मदद करती हैं। उदाहरण के लिए, नाल्ट्रेक्सोन शराब से मिलने वाले आनंद को कम करती है। एकैमप्रोसेट शराब छोड़ने के बाद आने वाली लक्षणों जैसे बेचैनी, नींद की समस्या को कम करती है। डिसल्फिराम शराब पीने पर शरीर में असुविधाजनक प्रतिक्रिया मतली, उल्टी, सिरदर्द पैदा करती है, जिससे पीना हतोत्साहित होता है। इन दवाईयों के सेवन से आपके लिए शराब छोङना काफी हद तक आसान हो जाता है।