How Unhealthy Eating Damages Both Your Stomach and Liver In Hindi : अस्वास्थ्यकर भोजन वे खाद्य पदार्थ होते हैं, जिनमें आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है, जबकि इनमें कैलोरी, अतिरिक्त चीनी, संतृप्त वसा और सोडियम की मात्रा अधिक पाई जाती है। ऐसे भोजन अक्सर अत्यधिक प्रसंस्कृत होते हैं, जैसे फास्ट फूड और स्नैक फूड। इनका नियमित सेवन शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और मोटापा, हृदय रोग, मधुमेह तथा अन्य दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।
अस्वास्थ्यकर भोजन हमारे शरीर में कई तरह की बीमारियाँ पैदा करता है, लेकिन मुख्य रुप से यह हमारे लिवर और पेट के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में हमें लिवर और पेट को नुकसान पहुंचाने वाले खाद्द पदार्थों के बारे में जानना आवश्यक हो जाता है। इस आर्टिकल में हम उन खाद्द पदार्थों के बारे में जानेंगे, जो हमारे लिवर और पेट दोनों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है।

अस्वास्थ्यकर भोजन हमारे लिवर को कैसे प्रभावित करता है ?
असंतुलित और अस्वास्थ्यकर भोजन हमारे लिवर को कई तरीकों से नुकसान पहुंचाता है।
फैटी लिवर
जब आहार में अस्वास्थ्यकर वसा और अतिरिक्त चीनी अधिक मात्रा में ली जाती है, तो यह वसा लिवर में जमा हो जाती है। इस स्थिति को फैटी लिवर रोग कहा जाता है, जिसे अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) के नाम से जाना जाता है। फैटी लिवर की समस्या का अगर समय रहते इलाज न किया जाए, तो ये समस्या आगे चलकर कई और बङी खतरनाक बीमारीयों को जन्म दे सकती है।
लिवर सिरोसिस
समय के साथ फैटी लिवर की स्थिति बिगड़ने पर लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचता है और उन पर घाव बनने लगते हैं। इस स्थायी क्षति को लिवर सिरोसिस कहा जाता है। सिरोसिस की अवस्था में लिवर की कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो जाती है और यह जीवन के लिए खतरा बन सकता है।
लिवर कैंसर
नियमित रुप से अस्वास्थ्यकर भोजन हमारे लिवर को धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त करने लगता है। जब लिवर लंबे समय तक क्षतिग्रस्त रहता है और सिरोसिस विकसित हो जाता है, तो लिवर कोशिकाओं के कैंसर, जिसे हेपाटोसेलुलर कार्सिनोमा के नाम से जाना जाता है, का खतरा काफी बढ़ जाता है। सिरोसिस के कारण नई कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया असामान्य हो सकती है, जिससे कैंसर विकसित होने की संभावना अधिक हो जाती है।
लिवर के काम करने की गति का धीमा होना
अत्यधिक प्रोसेस्ड और वसायुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इस वजह से लिवर को पोषक तत्वों को छानने, वसा को तोड़ने और शरीर को डिटॉक्स करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। समय के साथ यह अतिरिक्त बोझ लिवर की सामान्य कार्यप्रणाली को धीमा कर देता है और विभिन्न लिवर संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।
संक्रमण
हेपेटाइटिस ए, बी और सी वायरल संक्रमण होते हैं, जो लिवर को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। ये वायरस मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी, संक्रमित व्यक्ति के रक्त या शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलते हैं। संक्रमण की वजह से लिवर में सूजन और जलन हो जाती है, जिससे लिवर की सामान्य कार्यप्रणाली बाधित हो जाती है और लंबे समय तक यह स्थिति लिवर की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
लिवर फेलियर
गंभीर और लंबे समय तक अनुपचारित रहने पर वसायुक्त यकृत रोग आगे बढ़कर लिवर फेलियर का कारण बन सकता है। इस स्थिति में लिवर अपनी सामान्य कार्यक्षमता खो देता है और शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने, पाचन में मदद करने तथा आवश्यक प्रोटीन बनाने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। यह अवस्था जीवन-घातक हो सकती है और कई बार लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ती है।
फाइब्रोसिस
अस्वस्थ भोजन में पोषक तत्वों के मुकाबले अस्वस्थ वसा की मात्रा अधिक होती है। जब लिवर में लंबे समय तक ये अस्वस्थ वसा जमा रहता है, तो यह सूजन और लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकता है। समय के साथ यह नुकसान फाइब्रोसिस यानी ऊतकों पर कठोर घाव बनने का कारण बनता है। अगर समय रहते इस पर गौर न किया जाए, तो ये स्थिति और भी बिगड़ जाती है और यही आगे चलकर सिरोसिस में बदल सकती है, जिसमें लिवर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त और स्थायी रूप से निशानयुक्त हो जाता है।
लिवर के लिए नुकसानदायक खाद्द पदार्थ
लिवर को नुकसान पहुंचाने वाले खाद्द पदार्थ कुछ इस प्रकार हैं।
- रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट – सफेद ब्रेड, चावल, पास्ता और अन्य बेक्ड आइटम्स में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है और इनमें फाइबर लगभग नहीं होता। ऐसे खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ा देते हैं, जिससे लिवर में वसा जमा होने लगती है। यदि आप लिवर को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो इन फूड्स से दूरी बनाना बेहतर है।
- अत्यधिक नमकीन खाद्द पदार्थ – बहुत अधिक नमकीन प्रोसेस्ड स्नैक्स, डिब्बाबंद सूप, फास्ट फूड और नमकीन सॉस का सेवन शरीर में सोडियम का स्तर बढ़ा देता है। जब सोडियम की मात्रा अत्यधिक हो जाती है, तो शरीर में पानी रुकने लगता है और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इसका सीधा असर लिवर और अन्य अंगों पर पड़ता है, क्योंकि उन पर अतिरिक्त दबाव बनने लगता है। लंबे समय तक ज्यादा नमक का सेवन लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है।
- लाल मांस – प्रोटीन से भरपूर लाल मांस को पचाना लिवर के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। लिवर को प्रोटीन को तोड़ने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है और यदि प्रोटीन की मात्रा अत्यधिक हो जाए तो यह लिवर से संबंधित कई समस्याओं का कारण बन सकता है। इनमें फैटी लिवर प्रमुख है, जो आगे चलकर दिमाग और किडनी को भी नुकसान पहुँचा सकता है।
- फास्ट फूड – बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, वेफर्स जैसे फास्ट फूड प्रोसेस्ड तरीके से बनाए जाते हैं और इन्हें पचाना शरीर के लिए कठिन होता है। इन खाद्य पदार्थों में सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है, जो न केवल फैटी लिवर का खतरा बढ़ाते हैं, बल्कि खराब कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं।
- शराब – लिवर की बीमारियों के प्रमुख कारणों में से एक अत्यधिक शराब का सेवन है। अधिक मात्रा में शराब पीने से लिवर पर गहरा असर पड़ता है। जब लिवर शराब को तोड़ने का प्रयास करता है, तो इसके दौरान होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाएं लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाती हैं, जिससे सूजन और फाइब्रोसिस बनने लगता है। लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन करने पर स्थिति गंभीर होकर लिवर सिरोसिस में बदल सकती है।
अस्वास्थ्यकर भोजन हमारे पेट को कैसे नुकसान पहुंचाता है ?
जब हम अस्वस्थ आहार का सेवन करते हैं, तो इससे हमारे पेट को कई तरीके से नुकसान होता है। जानते हैं, उन सभी नकारात्मक प्रभावों के बारे में।
अपच और जलन
अस्वाथ्यकर भोजन हमारे पेट में अम्ल की मात्रा बढाने का एक कारण होता है। जब बहुत अधिक वसा युक्त या मसालेदार भोजन खाया जाता है, तो पेट को उसे पचाने में कठिनाई होती है। इससे एसिड का उत्पादन बढ़ सकता है, जिसके कारण पेट में भारीपन, गैस, जलन और सीने में एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो सकती है। हल्का, संतुलित और समय पर भोजन करने से इन लक्षणों को कम किया जा सकता है।
सूजन और कब्ज
असंतुलित आहार हमारे पेट में सूजन का कारण बन सकता है। अगर आहार में फाइबर की कमी हो और अस्वास्थ्यकर भोजन का सेवन अधिक हो, तो पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है। इसका परिणाम पेट फूलना, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं के रूप में सामने आता है, जो लंबे समय में लिवर और पाचन स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित कर सकता है।
मोटापा
जंक फूड में अधिक कैलोरी, अस्वास्थ्यकर वसा और शर्करा होती है, लेकिन ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी रहती है। नियमित रूप से इसका सेवन वजन बढ़ाने और मोटापे का कारण बनता है। पोषक तत्वों की कमी वाले आहार में वसा की मात्रा अधिक होती है, जो हमारे पेट में जमा हो जाती है और इसके परिणामस्वरुप हमारा वजन औ शरीर में मोटापा बढता जाता है। मोटापा न केवल शरीर पर अतिरिक्त बोझ डालता है बल्कि यह मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्ट्रोक और कुछ प्रकार के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा देता है।
एसिड रिफ्लक्स
अस्वास्थ्यकर भोजन हमारे पेट में अम्ल के स्तर को बढा सकता है, जिससे कई बार अति अम्ल की स्थिति पैदा हो सकती है। जब हम बहुत अधिक तैलीय या चिकनाईयुक्त भोजन का सेवन करते हैं, तो इससे पेट में अम्ल का स्तर बढ़ जाता है। इस अम्ल की अधिकता होने पर यह अम्ल कभी-कभी अन्नप्रणाली की ओर ऊपर आ जाता है, जिससे सीने में जलन, खट्टी डकार और असुविधा जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं
थकान और सुस्ती
जब आप एक बार में बहुत अधिक या भारी भोजन खाते हैं, तो उसे पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा लगानी पड़ती है। इस कारण खून का प्रवाह पाचन तंत्र की ओर अधिक हो जाता है और मस्तिष्क व शरीर के अन्य हिस्सों में ऊर्जा की कमी महसूस होती है। इसके परिणास्वरुप व्यक्ति सुस्त, थका हुआ और आलस से भरा हुआ महसूस करता है। छोटे-छोटे हिस्सों में संतुलित भोजन करना इस समस्या को कम कर सकता है।
मल त्याग में समस्या
जब आहार में पर्याप्त फाइबर नहीं होता, तो पाचन तंत्र सही से काम नहीं कर पाता। फाइबर की कमी के कारण मल कठोर हो सकता है, जिससे कब्ज हो जाती है। वहीं दूसरी ओर असंतुलित या अस्वास्थ्यकर भोजन दस्त का कारण भी बन सकता है। संतुलित फाइबर युक्त आहार लेने से मल त्याग नियमित और आसान होता है, जिससे पेट से जुङी सभी समस्याओं में राहत मिलती है।
आंतों में बैक्टीरिया का असंतुलन
उच्च वसा और चीनी से भरपूर आहार आंत में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया, जो हमारी आंत के लिए लाभकारी माने जाते हैं। उन बैक्टीरिया को कम कर सकता है और हानिकारक बैक्टीरिया की संख्या बढ़ा सकता है। इसका परिणाम आंतों के माइक्रोबायोम के असंतुलन के रूप में सामने आता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं, सूजन और यहां तक कि प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।।

पेट के लिए नुकसानदायक खाद्द पदार्थ
ऐसे खाद्द पदार्थ, जो पेट के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। उन जरुरी खाद्द पदार्थों का वर्णन कुछ इस प्रकार है।
- प्रसंस्कृत खाद्द पदार्थ – प्रसंस्कृत और शर्करा युक्त खाद्य पदार्थों में मौजूद हानिकारक योजक, अतिरिक्त चीनी, नमक और प्रिजर्वेटिव आंत के माइक्रोबायोम को बाधित कर सकते हैं और शरीर में सूजन पैदा कर सकते हैं।
- अत्यधिक वसा वाले खाद्द पदार्थ – अत्यधिक वसा वाले और तले हुए खाद्य पदार्थ हमारे पेट के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। इन खाद्द पदार्थों को पचाना कठिन होता है। इनके अत्यधिक सेवन से आमाशय में अम्ल की मात्रा बढ जाती है, जिससे पेट में सूजन व जलन की समस्या हो जाती है।
- मसालेदार भोजन – बहुत अधिक मसालेदार भोजन पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। ये हमारी आंत की परत को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे आंत कमजोर होती हैं। इसके परिणामस्वरुप कब्ज या दस्त जैसी समस्याएं पैदा होती है।
- उच्च अम्लीय खाद्द पदार्थ – उच्च-अम्लीय खाद्य पदार्थ, जैसे खट्टे फल और टमाटर पेट के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं, क्योंकि ये एसिड रिफ्लक्स और पेट की गड़बड़ी को बढ़ाते हैं। पेट में दर्द और असहजता को बढ़ा सकते हैं।
- शराब – शराब का सेवन पेट में जलन पैदा करता है और गैस्ट्राइटिस (पेट की परत की सूजन) का कारण बन सकता है, जिससे अपच, दर्द और मतली जैसे लक्षण हो सकते हैं। वहीं, डेयरी उत्पाद कुछ लोगों में लैक्टोज असहिष्णुता के कारण पेट खराब करने का कारण बन सकते हैं।