What Is Thyroid And How To Cure It In Hindi : वर्तमान समय में आधुनिक जीवन शैली और खान-पान के बदलते तरीकों के कारण लोगों में थायराइड एक बहुत ही सामान्य लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। लाखों लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं और इसकी वजह से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। थायराइड की बीमारी का सीधा असर हमारे वजन, हार्मोन्स, दिल की धड़कन, पाचन और ऊर्जा स्तर पर पड़ता है। आयुर्वेद के अनुसार थायराइड का मुख्य कारण वात, पित्त और कफ का असंतुलन है। वहीं आधुनिक चिकित्सा इसे एक नलिकाहीन (एंडोक्राइन) ग्रंथि की समस्या मानती है। इस आर्टिकल में हम थायराइड बीमारी के कारण, लक्षण और साथ ही इसके उपचार के तरीकों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

थायराइड क्या है ?
सभी लोग थायराइड को बीमारी के रुप में जानते हैं, लेकिन आपको बता दें, कि थायराइड हमारे गले के अंदर स्थित एक छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण अंतःस्रावी (Endocrine) ग्रंथि है। यह ग्रंथि हमारे शरीर में टी3 (Triiodothyronine) और टी4 (Thyroxine) नामक हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन हमारे शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करते हैं। उन सभी कार्यों में पाचन तंत्र का सही संचालन और हृदय की धड़कन को सामान्य रखना है।
इसके अलावा ये हार्मोन शरीर का तापमान नियंत्रित करते हैं और साथ ही मानसिक और शारीरिक वृद्धि में भी योगदान करते हैं। थायराइड हार्मोन के कई अन्य कार्य भी होते हैं, जैसे हड्डियों, मांसपेशियों और पेशियों का विकास करना, रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य करना। जब यह ग्रंथि सही से काम नहीं करती, तो शरीर में हार्मोन असंतुलन हो जाता है। यही स्थिति थायराइड रोग कहलाती है।
थायराइड के प्रकार
थायराइड मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है।
- हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) – इसमें थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाती है। इससे चयापचय की क्रिया तेज हो जाती है और व्यक्ति का वजन कम होने लगता है।
- हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) – इसमें ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती। इस स्थिति में वजन बढ़ने, थकान और कमजोरी जैसी समस्याएँ होती हैं।
थायराइड के लक्षण
थायराइड के दो मुख्य प्रकार हैं और दोनों के लक्षण अलग-अलग होते हैं।
हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण
- चिड़चिड़ापन और घबराहट।
- ज्यादा पसीना आना।
- दिल की धड़कन तेज होना।
- नींद न आना ।
- भूख ज्यादा लगना।
- वजन तेजी से कम होना।
- मांसपेशियों में कमजोरी।
हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण
- थकान और कमजोरी।
- डिप्रेशन और मूड स्विंग।
- बाल झड़ना।
- चेहरे और आंखों पर सूजन।
- कब्ज और पाचन संबंधी समस्या।
- मासिक धर्म में अनियमितता।
- दिल की धड़कन धीमी होना।
- याद्दाश्त कमजोर होना।
थायराइड क्यों होता है?
आज की व्यस्त और असंतुलित जीवनशैली थायराइड के सबसे बड़े कारणों में से एक है। इसके अलावा इसके अन्य कारण इस प्रकार हैं, जो इस बीमारी के खतरे को और अधिक बढाते हैं।
- असंतुलित आहार और जंक फूड।
- लंबे समय तक तनाव की स्थिति।
- शरीर में आयोडीन की कमी।
- वायरल इंफेक्शन।
- आनुवंशिक कारण।
- शारीरिक गतिविधि का अभाव।
महिलाओं में थायराइड के कारण
अधिकतर देखा जाता है, कि थायराइड की समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में कई गुना ज्यादा देखी जाती है। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैं।
- आनुवंशिकता – यदि परिवार में किसी को थायराइड है तो इसका खतरा बढ़ जाता है।
- उम्र – अधिक उम्र की महिलाओं में यह समस्या आम है।
- गर्भावस्था – अधिकतर महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव से थायराइड हो सकता है।
- हार्मोनल असंतुलन – महिला हार्मोन्स का असंतुलन थायराइड को ट्रिगर करता है।
- आयोडीन की कमी – शरीर में आयोडीन की कमी थायराइड की सबसे बड़ी वजहों में से एक है।
कैस करें थायराइड का परीक्षण ?
थायराइड बीमारी के इलाज से पहले उसका परीक्षण करना जरुरी होता है। डॉक्टर द्वारा थायराइड का परीक्षण करने के तरीकों का वर्णन इस प्रकार है।
- शारीरिक जांच – गले की जांच करके ग्रंथि का आकार पता लगाते हैं।
- रक्त परीक्षण – TSH, T3, T4 और एंटीबॉडी टेस्ट किए जाते हैं।
- थायराइड अल्ट्रासाउंड और स्कैन – गांठ या गण्डमाला की स्थिति जानने के लिए।
थायराइड का इलाज
थायराइड बीमारी के प्रकार अलग होते हैं, ऐसे में ये बीमारी रोगी के स्वास्थ्य को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करती हैं। यही कारण है, कि इसके इलाज के तरीके भी इसके प्रकार पर निर्भर करते हैं।
हाइपरथायरायडिज्म का इलाज
- एंटीथायरॉइड दवाएं, जो हार्मोन उत्पादन रोकती हैं।
- रेडियोआयोडीन थेरेपी, जो थायराइड कोशिकाओं को निष्क्रिय करती है।
- हाइपरथायरायडिज्म के लक्षणों को कम करने के लिए बीटा-ब्लॉकर्स को अपनाया जाता है। इससे इसके लक्षण जैसे तेज धड़कन को नियंत्रित किया जाता है।
- थायराइड की स्थिति अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाने पर इसका एकमात्र इलाज सर्जरी होती है। इसे थायरॉयडेक्टॉमी कहा जाता है। इस सर्जरी के बाद थायराइड ग्रंथि हटाने पर जीवनभर सिंथेटिक हार्मोन लेना जरूरी होता है।
हाइपोथायरायडिज्म का इलाज
- हाइपोथायरायडिज्म में इलाज का एक ही तरीका होता है। वह है, लेवोथायरोक्सिन दवा। ये दवा शरीर में हार्मोन संतुलित करने के लिए दी जाती है।

थायराइड के घरेलू उपाय
थायराइड बीमारी का आधुनिक उपचार के साथ ही कुछ घरेलू उपायों द्वारा भी उपचार किया जा सकता है। उपचार के इन घरेलू तरीकों की मदद से हम इस बीमारी को बढने से रोक सकते हैं।
- सुबह खाली पेट लौकी का जूस पीने से थायराइड नियंत्रित होता है।
- हरा धनिया पानी में उबालकर इसका सेवन करना फायदेमंद है।
- हफ्ते में 3–4 बार नारियल पानी पीने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और थायराइड नियंत्रित होता है।
- हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन थायराइड को कंट्रोल करता है। दिन में एक बार एक कप हल्दी के दूध का सेवन करने से थायराइड की बीमारी को बढने से रोका जा सकता है।
- तुलसी रस और ऐलोवेरा जूस मिलाकर सेवन करने से थायराइड की बीमारी में राहत मिलती है।
- थायराइड के लक्षणों को कम करने के लिए आयोडीन युक्त आहार का सेवन अच्छा माना जाता है। ऐसे में प्याज, लहसुन और टमाटर का सेवन लाभकारी है।
थायराइड मरीजों के लिए आहार योजना
थायराइड एक ऐसी बीमारी है, जो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। ऐसे में दवाईयों और उपचार के तरीकों के साथ ही आहार के नियमों का पालन भी करना जरुरी है। जानते हैं, थायराइड के रोगियों की उपचारात्मक आहार योजना के बारे में।
- ज्यादा से ज्यादा फल और हरी सब्जियाँ खाएँ।
- आयोडीन युक्त आहार जैसे नमक और सी-फूड लें।
- साबुत अनाज, प्रोटीन और फाइबर डाइट में शामिल करें।
- दूध, दही और कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ लें।
- विटामिन डी वाले आहार जैसे चीज और दूध का सेवन करें।
- तैलीय और जंक फूड से बचें।