हर साल 8 जून को विश्व महासागर दिवस मनाया जाता है। इस दिन का मकसद होता है लोगों को ये याद दिलाना कि हमारे महासागर कितने जरूरी हैं और इन्हें सुरक्षित रखना क्यों ज़रूरी है। सोचो, जिस पानी से हमें ऑक्सीजन मिलती है, जो करोड़ों जिंदगियों का घर है, वो अगर साफ न रहे तो क्या होगा।
आजकल pollution हर जगह बढ़ गया है और इसका असर समंदरों पर भी साफ दिखने लगा है। प्लास्टिक कचरा, तेल रिसाव और दूसरे तरह के जहरीले कचरे ने समुद्री जीवन को खतरे में डाल दिया है। ऐसे में विश्व महासागर दिवस हम सबको ये सोचने पर मजबूर करता है कि हम क्या कर सकते हैं ताकि इस नुकसान को रोका जा सके।
ये दिन हमें मोटिवेट करता है कि हम अपने आस-पास कुछ छोटे लेकिन असरदार कदम उठाएं, जैसे प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, समंदरों की सफाई में भाग लेना और दूसरों को भी इसके लिए अवेयर करना। क्योंकि जब तक हम सब मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक महासागरों को बचाना मुश्किल है।

ऐसे हुई थी विश्व महासागर दिवस की शुरूआत
विश्व महासागर दिवस को मनाने की शुरूआत साल 1992 में, जब कनाडा की सरकार ने ब्राजील के रियो डी जनेरियो में हुए ‘Earth Summit’ यानी पृथ्वी शिखर सम्मेलन में ये आइडिया रखा।
उस वक्त ये एक सामान्य सी पहल थी, लेकिन इसे वहां मौजूद कई देशों के प्रतिनिधियों और पर्यावरण प्रेमियों ने हाथों-हाथ लिया। इस विचार को इतना समर्थन मिला कि धीरे-धीरे इसकी गूंज संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच गई। फिर साल 2008 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दे दी और 8 जून को ‘विश्व महासागर दिवस’ के रूप में मनाने का ऐलान कर दिया।
तब से लेकर आज तक ये दिन समुद्रों की अहमियत को समझने, प्लास्टिक प्रदूषण से लड़ने और समुद्री जीवन के संरक्षण की ओर ध्यान दिलाने के लिए मनाया जाता है। समुद्र हमारे जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा हैं, चाहे बात जलवायु की हो या खाने-पीने की चीजों की। इसलिए एक दिन ऐसा होना जरूरी था जो हमें ये याद दिलाए कि इन महासागरों की रक्षा भी हमारी ही जिम्मेदारी है।

विश्व महासागर दिवस मनाने का महत्व
World Ocean Day को मनाने का मकसद सिर्फ एक awareness day मनाना नहीं है, बल्कि लोगों को ये समझाना है कि अगर हमने आज समुद्रों का ध्यान नहीं रखा, तो कल का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। समुद्रों में प्लास्टिक वेस्ट, तेल रिसाव, और बेतहाशा मछली पकड़ने जैसी चीजें न सिर्फ वहां की जैव विविधता को नुकसान पहुंचा रही हैं, बल्कि हमारे पूरे पर्यावरण को भी खतरे में डाल रही हैं।
आज के दौर में जब global warming और climate change की बातें हर जगह हो रही हैं, तो महासागर भी उससे अछूते नहीं हैं।
इसलिए इस दिन पर अलग-अलग सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम करती हैं कहीं beach clean-up drives होते हैं, तो कहीं ocean documentaries दिखाई जाती हैं, ताकि लोग समझ सकें कि ocean conservation सिर्फ वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सब की है। सोचिए, अगर समुद्र न हों, तो न बारिश होगी, न खाना मिलेगा और न ही सांस लेने के लिए साफ हवा।
इसलिए ये जरूरी है कि हम सिर्फ इस दिन नहीं, हर दिन अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाएं जैसे कम से कम प्लास्टिक का इस्तेमाल करना, मछली पकड़ने में sustainable तरीकों को बढ़ावा देना, और समुद्र तटों को साफ रखना। विश्व महासागर दिवस हमें एक मौका देता है सोचने का, समझने का और बदलाव की शुरुआत करने का। क्योंकि जब समुद्र सुरक्षित होंगे, तभी हमारा भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।
यह है सल 2025 की विश्व महासागर दिवस की थीम
बता दें कि इस बार World Oceans Day की थीम “वंडर: सस्टेनिंग व्हाट सस्टेन्स अस” यानी “अद्भुतता: जो हमें संजोए रखती है, उसे संजोए रखना” है। इस थीम का मकसद है लोगों को समुद्र की महत्ता और सुंदरता के प्रति जागरूक करना। समुद्र न सिर्फ हमें भोजन, ऑक्सीजन और दवाइयाँ देता है, बल्कि जलवायु संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।
लेकिन आज प्लास्टिक प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ना और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों से समुद्र की सेहत बिगड़ रही है। इस साल की थीम हमें याद दिलाती है कि समुद्र की अद्भुतता को सराहते हुए हमें उसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। क्योंकि अगर हम अब नहीं जागरुक हुए, तो आने वाली पीढ़ियाँ सिर्फ किताबों में ही समुद्र की सुंदरता के बारे में पढ़ पाएँगी।