Autistic Pride Day 2025: जानिए क्या है Autistic Pride Day, इस दिन के पीछे का इतिहास और महत्व

Autistic Pride Day 2025: हर साल 18 जून को दुनियाभर में Autistic Pride Day मनाया जाता है। इस दिन का मकसद है ऑटिज्म से जूझ रहे लोगों को सम्मान देना और उन्हें ये महसूस कराना कि वो भी इस समाज का अहम हिस्सा हैं।
ऑटिज्म एक ऐसा neurological disorder है जो बच्चे के brain development को प्रभावित करता है, और इसके असर शुरूआती उम्र यानी 3 साल से पहले ही दिखने लगते हैं। हर बच्चे में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए इसे समझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
अब बात करते हैं इसके इतिहास की। Autistic Pride Day की शुरुआत ब्राजील में हुई थी। साल 2005 में ‘Aspies for Freedom’ (AFF) नाम की एक संस्था ने इसे पहली बार celebrate किया था। उसी दिन से लेकर आज तक, हर साल 18 जून को ये दिन दुनिया भर में मनाया जा रहा है।
इस दिन की खास बात ये है कि ये सिर्फ जागरूकता फैलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ये ऑटिज्म से ग्रसित लोगों की पहचान और उनके टैलेंट को सेलिब्रेट करता है। ये दिन हमें ये सिखाता है कि हर इंसान यूनिक होता है और हमें उन्हें वैसे ही अपनाना चाहिए जैसे वो हैं।

जानिए क्या है AFF

Aspies for Freedom यानी AFF एक ऐसा समुदाय है जो Autism को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने का काम करता है। ये नाम सुनकर शायद आपको लगे कि ये कोई ऑफिशियल संस्था है, लेकिन असल में ये एक ग्रुप है जिसे कुछ ऐसे लोगों ने मिलकर बनाया जो खुद Autistic थे या Autism को करीब से समझते थे।
इसकी शुरुआत साल 2004 में हुई थी, जब Autistic लोगों के साथ गलत तरीके से पेश आने के कुछ मामले सामने आए। ऐसे में कुछ लोगों ने मिलकर तय किया कि अब चुप नहीं बैठा जाएगा। उन्होंने Aspies for Freedom नाम से एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया, जहां Autism से जुड़ी सही जानकारी शेयर की जाती थी और Autistic लोगों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई।
इस ग्रुप का सबसे बड़ा मकसद था कि Autism को कोई बीमारी या कमजोरी न समझा जाए, बल्कि इसे एक अलग neurological condition की तरह देखा जाए। ये लोग कहते हैं कि Autistic लोग भी समाज का हिस्सा हैं और उन्हें भी उतना ही सम्मान मिलना चाहिए जितना किसी और को मिलता है।
Aspies for Freedom ने कई तरह के Campaigns और Online Discussions के जरिए Autism से जुड़ी भ्रांतियों को तोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने neurodiversity यानी मानसिक विविधता को प्रमोट किया और ये बताया कि हर इंसान का सोचने और समझने का तरीका अलग होता है और यही diversity असल में खूबसूरती है।

ऑटिस्टिक प्राइड डे का उद्देश्य

ऑटिस्टिक प्राइड डे हर साल इसलिए मनाया जाता है ताकि लोगों को ऑटिज्म के बारे में सही जानकारी मिल सके और समाज में इसको लेकर फैली गलतफहमियों को दूर किया जा सके। इस दिन का मकसद ये बताना है कि ऑटिज्म से जूझ रहे बच्चों या बड़ों में भी वो सारी क्षमताएं होती हैं जो किसी भी और इंसान में होती हैं, बस उन्हें समझने और सपोर्ट करने की जरूरत होती है।
ये दिन ऑटिस्टिक लोगों को ये अहसास दिलाने के लिए भी खास है कि उन्हें अपने होने पर गर्व होना चाहिए। उन्हें एक ऐसा माहौल मिलना चाहिए जहां वो खुलकर अपने टैलेंट और सोच को दिखा सकें, बिना किसी डर या भेदभाव के।
सोशल मीडिया पर लोग इस दिन को खास बनाने के लिए पोस्ट्स शेयर करते हैं, अपने अनुभवों के बारे में लिखते हैं और दूसरों को भी जागरूक करते हैं। इसके साथ ही AASD जैसे संगठन इस मौके पर कई तरह के इवेंट्स और एक्टिविटीज भी करवाते हैं ताकि ऑटिज्म से जुड़ी समझ और संवेदनशीलता बढ़ सके।

ऑटिज्म के लक्षण: बच्चों में कैसे पहचानें ये संकेत

अगर कोई बच्चा 2 साल की उम्र तक बोलना शुरू नहीं करता, या फिर उसकी भाषा समझने और बोलने की क्षमता बहुत धीमी हो, तो ये ऑटिज्म का एक शुरुआती संकेत हो सकता है।

अक्सर ऐसे बच्चे अपनी दुनिया में खोए रहते हैं। जब कोई उन्हें बुलाता है या बात करता है, तो वे जवाब नहीं देते। उन्हें दूसरों के साथ खेलना पसंद नहीं आता, और ना ही वे आसानी से किसी से जुड़ पाते हैं। कई बार बच्चे एक ही चीज को बार-बार दोहराते हैं, जैसे किसी खिलौने को लगातार घुमाना या एक ही सवाल को बार-बार पूछना। कुछ बच्चों को Eye Contact बनाना भी मुश्किल लगता है। वे लोगों के चेहरे नहीं देखते, मुस्कुराते नहीं या कोई भाव नहीं दिखाते।

बातचीत के दौरान उनकी Body Language भी काफी अलग होती है। ऐसा जरूरी नहीं कि ये सारे लक्षण एक ही बच्चे में हों। हर बच्चे का अनुभव अलग हो सकता है। लेकिन अगर इनमें से कुछ संकेत लगातार दिख रहे हैं, तो बेहतर होगा कि आप किसी Child Specialist या Pediatric Neurologist से सलाह लें। ऑटिज्म का सही समय पर इलाज होना बहुत जरूरी है। इसका इलाज दवाओं से कम और Therapy से ज्यादा होता है। जैसे Behaviour Therapy, Speech Therapy और Occupational Therapy से बच्चों को बेहतर तरीके से चीजें समझने और एक्सप्रेस करने में मदद मिलती है।

ध्यान रहे, जितना जल्दी ऑटिज्म को पहचानकर ट्रीटमेंट शुरू किया जाए, उतना ही बेहतर रिजल्ट मिल सकता है। कई बार पैरेंट्स सोचते हैं कि बच्चा धीरे-धीरे खुद ही सीख जाएगा, लेकिन अगर Autism के लक्षण साफ दिखाई दे रहे हैं तो इंतजार करने की बजाय तुरंत Action लेना जरूरी है।

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