Antibiotic Uses, Precautions, Side Effects In Hindi : आज के समय में लोगों का आहार और जीवनशैली ऐसी हो गई है, कि शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा होगा, जिसे कोई स्वास्थ्य समस्या न हो। बात जब भी किसी स्वास्थ्य समस्या के इलाज की आती है, तो एंटीबायोटिक्स का नाम सबसे पहले आता है। एंटीबायोटिक्स शक्तिशाली और जीवनरक्षक दवाएँ हैं, जिनका उपयोग बैक्टीरियल संक्रमणों जैसे स्ट्रेप थ्रोट, मूत्र पथ संक्रमण (UTI), निमोनिया और त्वचा के गंभीर संक्रमणों में किया जाता है, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है, कि एंटीबायोटिक्स हर बीमारी में असरदार नहीं होतीं।
सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसे वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक्स दवाएँ बिल्कुल काम नहीं करतीं। अगर इन दवाओं का गलत तरीके से या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए, तो यह न केवल शरीर को नुकसान पहुँचाती है, बल्कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (Antibiotic Resistance) जैसी खतरनाक वैश्विक समस्या को जन्म देती है। इस आर्टिकल में हम एंटीबायोटिक्स के लाभ, दुष्प्रभाव, उपयोग करने के तरीके और सावधानियों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

एंटीबायोटिक्स क्या हैं ?
एंटीबायोटिक्स ऐसी दवाएँ हैं, जो बैक्टीरिया को मारने या उनकी वृद्धि रोकने का काम करती हैं। ये बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण का इलाज करती हैं, लेकिन वायरस के खिलाफ इनका कोई प्रभाव नहीं होता। बैक्टीरिया बेहद छोटे जीवाणु हैं, जो हर जगह पाए जाते हैं।आपकी त्वचा पर, आंतों में और वातावरण में। अधिकांश बैक्टीरिया हानिकारक नहीं होते, बल्कि कुछ तो शरीर के लिए जरूरी भी होते हैं। उदाहरण के लिए आंतों में रहने वाले अच्छे बैक्टीरिया पाचन में मदद करते हैं।
बैक्टीरिया शरीर के लिए लाभदायक होते हैं, लेकिन कुछ हानिकारक बैक्टीरिया गंभीर संक्रमण का कारण भी बनते हैं, जैसे गले का संक्रमण, निमोनिया या सेप्सिस। बैक्टीरिया से जुडी बीमारी में एंटीबायोटिक्स बेहद जरूरी साबित होती हैं और कभी-कभी जीवन बचाने का काम भी करती हैं। ऐसी स्थिति में आवश्यक है, कि हमें इनके बारे में सही जानकारी हो और साथ ही डॉक्टर से सलाह लेकर ही किसी एंटीबायोटिक्स का सेवन करें।
एंटीबायोटिक्स कैसे काम करती हैं ?
एंटीबायोटिक्स दो तरीकों से काम करती हैं, जिसका वर्णन इस प्रकार है।
- बैक्टीरिया को नष्ट करके (Bactericidal effect) – एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति या डी.एन.ए को नुकसान पहुँचाकर उन्हें मार देती हैं।
- बैक्टीरिया की वृद्धि रोककर (Bacteriostatic effect) – एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया को आवश्यक प्रोटीन बनाने से रोक देती हैं, जिससे वे आगे बढ़ और गुणा नहीं कर पाते।
इस तरह एंटीबायोटिक्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण पर काबू पाने का समय और मौका देती हैं।
एंटीबायोटिक के प्रकार
एंटीबायोटिक्स के अलग-अलग वर्ग होते हैं, जो रोगी की शारीरिक स्थिति और रोग के अनुसार दी जाती है। हर वर्ग विशेष प्रकार के संक्रमण में काम आता है। वैसे तो एंटीबायोटिक्स के कई वर्ग है, लेकिन कुछ मुख्य वर्ग और उनके उदाहरण इस प्रकार हैं।
- पेनिसिलिन (Penicillins) – अमोक्सिसिलिन और एम्पीसिलिन।
- सेफालोस्पोरिन (Cephalosporins) – सेफालेक्सिन और सेफ्ट्रियाक्सोन।
- मैक्रोलाइड्स (Macrolides) – एजिथ्रोमाइसिन और क्लैरिथ्रोमाइसिन।
- टेट्रासाइक्लिन (Tetracyclines) – डॉक्सीसाइक्लिन।
- क्विनोलोन्स (Quinolones) – सिप्रोफ्लोक्सासिन और लेवोफ्लोक्सासिन।
- एमिनोग्लाइकोसाइड्स (Aminoglycosides) – जेंटामाइसिन।
- लिंकोसामाइड्स (Lincosamides) – क्लिंडामाइसिन।
- नाइट्रोइमिडाजोल्स (Nitroimidazoles) – मेट्रोनिडाजोल।
एंटीबायोटिक्स के रूप
एंटीबायोटिक्स कई प्रकार के वर्गों का समूह है। ये किसी एक दवा का नाम नहीं है, बल्कि इसके कई अलग-अलग रुप हैं। एंटीबायोटिक्स के सभी रुपों में से कुछ प्रमुख रुप और उसके उदाहरण इस प्रकार है।
- ओरल (Oral) – टैबलेट, कैप्सूल या सिरप।
- टोपिकल (Topical) – क्रीम, मलहम, आई ड्रॉप्स या ईयर ड्रॉप्स।
- इंजेक्शन/IV – गंभीर संक्रमणों के लिए नस या मांसपेशियों में दिया जाता है।

एंटीबायोटिक्स के उपयोग
आमतौर पर एंटीबायोटिक्स का कोई निश्चित रुप नहीं होता, क्योंकि ये रोगी के शरीर में होने वाले संक्रमण पर निर्भर करता है। जानते हैं, शरीर के कुछ मुख्य संक्रमण और उनसे जुडी बीमारियों के बारे में।
- त्वचा और मुलायम ऊतकों के संक्रमण – सेल्युलाइटिस, स्टैफ इंफेक्शन, गैस गैंग्रीन, इम्पेटिगो।
- गले और श्वसन तंत्र के संक्रमण – जीवाणुजनित निमोनिया, स्ट्रेप थ्रोट, काली खाँसी।
- मूत्र और प्रजनन प्रणाली के संक्रमण – मूत्र पथ संक्रमण (UTI), बैक्टीरियल वेजिनोसिस, यौन संचारित रोग (STIs)।
- आँखों के संक्रमण – गुलाबी आँख (कंजक्टिवाइटिस), ऑर्बिटल सेल्युलाइटिस।
- अन्य गंभीर संक्रमण – सेप्सिस, एंथ्रेक्स, लाइम डिजीज, एंडोकार्डाइटिस।
एंटीबायोटिक्स के लाभ
एंटीबायोटिक्स मुख्य रुप से शरीर में होने वाले संक्रमण का उपचार करने के लिए जानी जाती है, जिनके मुख्य लाभ हैं।
- बैक्टीरियल संक्रमण को सफलतापूर्वक खत्म करना।
- लक्षणों में तेजी से सुधार लाना।
- जटिलताओं और गंभीर बीमारियों से बचाना।
- संक्रमण दूसरों तक फैलने से रोकना।
- जीवन बचाना यानि जान को नुकसान पहुंचाने वाले संक्रमण को खत्म करना।
एंटीबायोटिक्स के दुष्प्रभाव
आमतौर पक एंटीबायोटिक्स लेने के 1–3 दिनों के भीतर असर देखने को मिल जाता है, लेकिन आपको बता दे, कि अन्य सभी दवाओं की तरह इसके भी कुछ हल्के और गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं, जो इस प्रकार हैं।
हल्के दुष्प्रभाव
- दस्त लगना।
- मितली या उल्टी आना।
- पेट दर्द होना।
- चक्कर आना।
- त्वचा पर रैशेज होना।
- खमीर संक्रमण की शिकायत होना।
गंभीर दुष्प्रभाव
- गंभीर डायरिया की स्थिति होना।
- गंभीर एलर्जी यानि एनाफिलैक्सिस होना, जिससे साँस लेने में तकलीफ, होंठ या गले में सूजन आ जाती है।
- एंटीबायोटिक्स के लंबे समय तक उपयोग करने से हड्डियों में कमजोरी आ सकती है।
- एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा पैदा होना। एंटीबायोटिक्स रेजिस्टेंस के अनुसार जब एंटीबायोटिक्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल होता है, तो बैक्टीरिया इनके प्रति प्रतिरोधक हो जाते हैं। इसका मतलब है, कि वही दवा भविष्य में काम नहीं करती, क्योंकि इसके कारण कई संक्रमणों का इलाज करना मुश्किल हो जाता है।

एंटीबायोटिक्स लेने से पहले किन बातों का रखें खास ध्यान ?
एंटीबायोटिक्स बेहद असरदार और भरोसेमंद दवा है, लेकिन इसके बावजूद भी हमें इसका सेवन करने से पहले कुछ जरुरी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है, ताकि ये हमें लाभ के स्थान पर नुकसान न पहुंचा दें।
- एंटीबायोटिक्स को शराब या बिना डॉक्टर से पूछे अन्य दवाओं के साथ न लें।
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
- अगर दवा लेते समय गंभीर एलर्जी या साँस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं या आपातकालीन मदद लें।
- एंटीबायोटिक्स दवा से किसी भी संक्रमण के लक्षण जल्दी कम हो सकते हैं, फिर भी इसका पूरा कोर्स खत्म करना जरूरी है, ताकि संक्रमण पूरी तरह खत्म हो जाए।
- कोई भी एंटीबायोटिक्स हमेशा डॉक्टर की सलाह पर लें और साथ ही डॉक्टर के द्वारा बताई गई खुराक और अवधि का पालन करें।
- इलाज प्रक्रिया के बीच में दवा रोकने से बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते और संक्रमण दोबारा लौट सकता है।
- हर रोगी के शरीर की स्थिति और संक्रमण का प्रकार अलग होता है, तो जरुरी है कि दवा आपके संक्रमण और स्वास्थ्य इतिहास के आधार पर ही लें।