पर्यावरण संरक्षण की अहमियत आज के दौर में जितनी जरूरी है, उतनी शायद पहले कभी नहीं थी। बढ़ती ग्लोबल वॉर्मिंग, मौसम में असामान्य बदलाव और विलुप्त होते जानवरों की संख्या इस बात का संकेत हैं कि अगर अब भी हम नहीं जागे, तो भविष्य अंधकारमय हो सकता है।
हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, ताकि हम सभी को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास हो और हम सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ा सकें। इस दिन की शुरुआत 1972 में संयुक्त राष्ट्र ने की थी, और तब से यह दुनिया भर में मनाया जाता है।

ये है World Environment Day 2025 की थीम
World Environment Day 2025 की थीम रखी गई है “End Plastic Pollution” यानी प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करना।
अब सोचिए, प्लास्टिक जो हम रोजमर्रा की ज़िंदगी में इस्तेमाल करते हैं जैसे पानी की बोतलें, चिप्स के पैकेट, स्ट्रॉ, शॉपिंग बैग – यही चीजें अब धरती और हमारे जीवन के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी हैं।
यही वजह है कि इस साल का फोकस इसी पर रखा गया है। प्लास्टिक की सबसे बड़ी परेशानी ये है कि ये आसानी से गलता नहीं है। मतलब अगर आपने आज एक प्लास्टिक की बोतल फेंकी, तो वो सैकड़ों सालों तक वैसे ही पड़ी रह सकती है। और अगर वो पानी में चली जाए, तो समुद्री जीव-जंतुओं के लिए जानलेवा बन जाती है। बहुत से जानवर गलती से इसे खाना समझ लेते हैं, जिससे उनकी जान तक चली जाती है। इंसानों के लिए भी ये खतरा कम नहीं है। प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़े जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है, हमारी हवा, पानी और यहां तक कि खाने में भी मिल रहे हैं। रिसर्च में सामने आया है कि ये माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में जाकर कई तरह की बीमारियों को जन्म दे सकते हैं।
हर साल करोड़ों टन प्लास्टिक बनाया और इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसमें से बहुत ही कम हिस्सा रिसाइकिल हो पाता है। बाकी सब कचरे के रूप में जमा होता रहता है। यही वजह है कि अब समय आ गया है जब हमें इस खतरे को रोकने के लिए सीरियस होना पड़ेगा।
World Environment Day 2025 की थीम हमें यही याद दिलाती है कि अगर हमें अपने पर्यावरण को बचाना है, तो प्लास्टिक की लत को छोड़ना ही होगा।
चाहे वो एक छोटी सी आदत हो जैसे शॉपिंग के लिए कपड़े का बैग ले जाना या प्लास्टिक स्ट्रॉ की जगह स्टील स्ट्रॉ का इस्तेमाल करना हर कदम मायने रखता है। आइए, इस Environment Day पर हम सब मिलकर एक छोटा लेकिन असरदार बदलाव करें प्लास्टिक से दूरी बनाएं और पर्यावरण को बचाएं।

इस कारण से 5 जून को ही मनाया जाता है World Environment Day
आपको बता दें कि हर साल 5 जून को World Environment Day मनाने के पीछे एक बड़ी वजह और इतिहास छुपा है, जो पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत से जुड़ा हुआ है। दरअसल, साल 1972 में 5 जून को एक बेहद अहम ग्लोबल इवेंट हुआ था जिसे “स्टॉकहोम कॉन्फ्रेंस” के नाम से जाना जाता है।
ये दुनिया का पहला बड़ा इंटरनेशनल सम्मेलन था जो सिर्फ और सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं पर फोकस कर रहा था। इस मीटिंग में कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए और सभी ने मिलकर इस बात को समझा कि अगर हमें पृथ्वी को बचाना है, तो हमें अभी से कदम उठाने होंगे।
इसी सम्मेलन के दौरान यूनाइटेड नेशन्स एनवायरनमेंट प्रोग्राम यानी UNEP की नींव रखी गई। फिर यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली ने तय किया कि हर साल 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के तौर पर मनाया जाएगा, ताकि दुनियाभर के लोग पर्यावरण की अहमियत को समझें और इसे बचाने के लिए कुछ ठोस करें। यानी 5 जून सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक ग्लोबल कमिटमेंट का प्रतीक है, जो हमें हर साल याद दिलाता है कि धरती हमारी है, और इसकी देखभाल भी हमारी जिम्मेदारी है।