Gas and Indigestion: Effective Ayurvedic & Modern Solutions In Hindi : गैस और अपच पाचन तंत्र से जुड़ी बेहद सामान्य समस्याएँ हैं, जो अक्सर खान-पान और जीवनशैली के कारण होती हैं। गैस तब बनती है, जब पाचन तंत्र भोजन को तोड़ने की प्रक्रिया में हवा और गैस उत्पन्न करता है। इसका परिणाम पेट फूलना, डकार आना या गैस पास होना हो सकता है। दूसरी ओर अपच खाने के बाद पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, जलन या असुविधा के रूप में महसूस होती है। वैसे तो सामान्य तौर पर गैस और अपच की समस्याओं के कई कारण होते हैं और लगभग सभी कारण आपस में जुङे हुए होते हैं। जल्दी-जल्दी खाने या पीने से हवा निगलने की वजह से पेट में गैस भर सकती है।
कुछ खाद्य पदार्थों का पाचन कार्बोहाइड्रेट जैसे फाइबर, स्टार्च और शर्करा जब आंतों के बैक्टीरिया द्वारा टूटते हैं, तो गैस बनती है। भले ही गैस और अपच के लक्षण अलग हों, लेकिन ये दोनों समस्या मुख्य रुप से पाचन से संबंधित होती है। वर्तमान समय में ये समस्या बहुत आम हो चुकी है और लोग चाहकर भी इससे खुद को बचा नहीं पाते। ऐसे में कुछ ऐसे आर्युवेदिक और घरेलू नुस्खों के बारे में जानकारी होना आवश्यक होता है, जो इस समस्या को ज्यादा होने से पहले ही रोक देते हैं। जानते हैं ऐसे उपायों के बारे में, जो समय रहते आपको गैस और अपच की समस्या से बचा सकते हैं।

गैस और अपच से बचने के लिए आर्युवेदिक नुस्खें
पेट से जुङी बीमारीयों से छुटकारा पाने के लिए कुछ आवश्यक घरेलू उपायों का वर्णन इस प्रकार है।
नींबू और अदरक की चाय
नींबू और अदरक की चाय एक बेहतरीन घरेलू नुस्खा है, जो न केवल स्वाद में ताज़गी लाती है, बल्कि पेट की कई परेशानियों को भी दूर करती है। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण पाचन को बेहतर बनाते हैं और खासकर गैस या भारीपन की समस्या से राहत दिलाते हैं। नींबू में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मदद करते हैं, वहीं अदरक अपने सूजनरोधी और कार्मिनेटिव गुणों के कारण पेट फूलना और गैस जैसी दिक्कतों को कम करता है।
जब इन दोनों को मिलाकर चाय बनाई जाती है, तो यह पेट को हल्का करने और शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करती है। आप इसे बनाने के लिए एक कप पानी में कुछ अदरक के टुकड़े डालकर उबालें, फिर इसमें आधे नींबू का रस मिलाएं। चाहें तो थोड़ा शहद भी डाल सकते हैं ताकि स्वाद और भी अच्छा लगे।
सौंफ
सौंफ भारत के लगभग हर घर में मिल जाती है और इसे खाने के बाद माउथ फ्रेशनर के तौर पर भी खूब खाया जाता है। इसके फायदे केवल स्वाद तक ही सीमित नहीं हैं। सौंफ पेट के लिए किसी रामबाण से कम नहीं मानी जाती। इसमें ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जो गैस को बाहर निकालने, पेट की सूजन को कम करने और पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मदद करते हैं। यही वजह है, कि इसे खाना खाने के बाद चबाने की आदत हमारे बुजुर्गों ने हमेशा अपनाई।
सौंफ का ठंडा स्वभाव शरीर को ठंडक भी प्रदान करता है और अम्लता जैसी समस्या को दूर करने में मदद करता है। अगर आप चाहें तो सौंफ की चाय भी बना सकते हैं। इसके लिए एक कप पानी में एक चम्मच सौंफ डालकर उबाल लें और हल्का गुनगुना होने पर पी लें। यह चाय गैस, अपच और पेट दर्द में राहत देने का एक आसान और असरदार तरीका है।
त्रिफला
त्रिफला आयुर्वेद का एक बेहद लोकप्रिय नुस्खा है, जिसका इस्तेमाल सदियों से पाचन और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किया जाता रहा है। त्रिफला के नाम से ही पता चलता है, कि यह तीन फलों का मिश्रण है, आंवला, हरड़ और बहेड़ा। ये तीनों ही फल अपने-अपने औषधीय गुणों के लिए मशहूर हैं और साथ मिलकर यह पाचन तंत्र की सफाई और मजबूती में बड़ी भूमिका निभाते हैं। त्रिफला कब्ज को दूर करने और मल त्याग को नियमित बनाने में मदद करता है।
यह आंतों को धीरे-धीरे साफ करता है और डिटॉक्सिफिकेशन की प्रक्रिया में भी मदद करता है। साथ ही, आंवला इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स प्रदान करता है, हरड़ पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती है और बहेड़ा आंतों को मजबूत बनाता है। इसे लेने का सबसे आसान तरीका है, त्रिफला चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ रात को सोने से पहले लेना। त्रिफला के नियमित सेवन से न केवल पाचन सुधरता है बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होती है।
जीरा
जीरा हर भारतीय रसोई में मौजूद एक आम लेकिन बेहद फायदेमंद मसाला है। इसे आयुर्वेद में दीपनीय और पाचन गुणों वाला बताया गया है। आर्युवेद जगत में जीरे को भूख बढ़ाने और पाचन सुधारने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। खासतौर पर गैस, पेट फूलना और भारीपन जैसी समस्याओं के लिए यह बहुत असरदार माना जाता है। जीरे में मौजूद प्राकृतिक तेल आंतों की ऐंठन को कम करते हैं और पाचन एंजाइम्स के स्राव को बढ़ावा देते हैं।
यही कारण है, कि भोजन के बाद जीरे का सेवन करने से गैस और अपच की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है। इसे कई तरीकों से लिया जा सकता है। आप जीरे को हल्का भूनकर पाउडर बना लें और खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ लें। इसके अलावा आप सुबह खाली पेट जीरा पानी भी पी सकते हैं। इसके लिए बस रातभर पानी में जीरा भिगो दें और सुबह उसे उबालकर गुनगुना छानकर पिएं।
सेब का सिरका
सेब का सिरका पाचन सुधारने के लिए एक बहुत लोकप्रिय घरेलू नुस्खा है। इसमें मौजूद एसीटिक एसिड पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड के स्तर को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे खाना आसानी से टूटता और जल्दी हजम हो जाता है। यही वजह है, कि इसे खाने से पहले या खाने के साथ लेने पर पेट हल्का और आरामदायक महसूस होता है। कई लोग इसे पेट फूलना, अपच और गैस की समस्या कम करने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं।
हल्की खटास और एंजाइम्स पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं, जिससे शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है। इसे इस्तेमाल करने का सबसे अच्छा तरीका है, कि एक गिलास गुनगुने पानी में एक या दो चम्मच ऑर्गेनिक, अनफ़िल्टर्ड सेब का सिरका डालकर भोजन से 20-30 मिनट पहले पिया जाए।
जायफल और नींबू का रस
जायफल को नींबू के रस के साथ लेना पाचन संबंधी समस्याओं के लिए एक पुराना और असरदार घरेलू नुस्खा माना जाता है। जायफल में प्राकृतिक गुण होते हैं, जो पेट को शांत करते हैं और गैस या बदहजमी जैसी समस्या को कम करते हैं। वहीं नींबू का रस पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है और शरीर से जहरीले कीटाणुओं को बाहर निकालने में मदद करता है। जब नींबू के रस में जायफल मिलाकर लिया जाता है, तो यह संयोजन पेट की भारीपन की समस्या को कम करता है, भोजन को जल्दी पचाने में मदद करता है और आंतों की सफाई भी करता है।
कई लोग इसे खाने के बाद होने वाली जलन या अपच में भी राहत पाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ ही ये भी ध्यान रखें, कि जायफल की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे बहुत ज़्यादा मात्रा में नहीं लेना चाहिए। बस चुटकी भर जायफल नींबू रस के साथ काफी होता है।

अदरक
अदरक को पाचन के लिए रामबाण माना जाता है, क्योंकि यह पाचन रसों और एंजाइमों के स्राव को बढ़ाता है। इससे खाना जल्दी टूटता है और शरीर को पोषक तत्वों को अवशोषित करने में आसानी होती है। अदरक की गर्म तासीर पेट की मांसपेशियों को आराम देती है, जिससे गैस, सूजन और ऐंठन जैसी समस्याएं भी कम हो जाती हैं।
अदरक की खास बात यह है, कि ये मतली और उल्टी को भी रोकने में असरदार है, इसलिए इसे अक्सर यात्रा के दौरान जी मिचलाने, उल्टी आने या गर्भावस्था में मॉर्निंग सिकनेस के लिए सुझाया जाता है। इसे आप कई तरीकों से ले सकते हैं। ताजा अदरक को चाय में डालकर, भोजन में मसाले के रूप में या फिर अदरक का छोटा टुकड़ा नमक और नींबू के साथ चबाकर।
बेकिंग सोडा
जब पेट में अम्ल की मात्रा ज़्यादा बढ़ जाती है, तो सीने में जलन, खट्टी डकारें और अपच जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। बेकिंग सोडा, जिसे सोडियम बायोकार्बोनेट के नाम से जाना जाता है। ये एक प्राकृतिक एंटासिड की तरह काम करता है। यह पेट के अतिरिक्त एसिड को न्यूट्रलाइज़ कर देता है, जिससे तुरंत आराम मिलता है। आधा गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर धीरे-धीरे पिएं। यह अपच, गैस और एसिडिटी से राहत दिलाने में असरदार होता है। इसके अलावा बेकिंग सोडा की थोङी मात्रा में सेवन से ही पेट से जुङी कई परेशानियों में राहत मिलती है।
करी पत्ते
करी पत्ते अपच और पेट की समस्या से राहत दिलाने का एक बेहतरीन घरेलू उपाय हैं। इसके लिए लगभग 20-25 ताज़े करी पत्तों को ठंडे पानी से अच्छी तरह धोकर उनका रस निकाल लें। अब एक कप सादे पानी में करी पत्तों का रस, लगभग एक छोटा चम्मच नींबू का रस और एक छोटा चम्मच शहद मिलाकर अच्छी तरह घोल लें। यह मिश्रण हमेशा ताज़ा ही बनाकर पीना चाहिए। इसका सेवन अपच के कारण होने वाली मतली, उल्टी और पेट फूलने जैसी समस्याओं में तुरंत राहत प्रदान करता है।
धनिया
धनिया अपने सूजनरोधी गुणों के कारण पेट की खराबी और अपच से राहत दिलाने में बहुत उपयोगी है। यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ-साथ उसे अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने में मदद करता है। धनिया में उड़द का तेल नामक एक आवश्यक तेल पाया जाता है, जो लिवर को डिटॉक्सीफाई करता है, भूख को बढ़ाता है और पाचन क्रिया को संतुलित रखता है। यदि आप लगभग एक हफ्ते तक नियमित रूप से धनिया के बीजों का पानी पिएंगे, तो इसके लाभ स्पष्ट रूप से महसूस होंगे। साथ ही धीरे-धीरे आपके पेट और गैस से संबंधित समस्याएं खत्म होने लगेंगी।
हींग
हींग अपच और गैस की समस्या दूर करने का एक बेहद असरदार घरेलू उपाय है। इसके लिए लगभग 5 ग्राम हींग को एक गिलास गुनगुने पानी में अच्छी तरह घोल लें। स्वाद को थोड़ा बेहतर बनाने के लिए इसमें एक छोटी चम्मच चीनी भी मिला सकते हैं। भले ही इसे पीते समय इसकी गंध कुछ लोगों को तेज और अप्रिय लगे, लेकिन यह पेट की गैस को तुरंत बाहर निकालने में मदद करती है और अपच से जल्दी राहत दिलाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी भोजन या दाल-सब्जी में हींग का इस्तेमाल करने से वह भोजन पचने में आसानी होती है। इतना ही नहीं कई बार अत्यधिक मिर्च-मसालों के साथ अगर चुटकी भर हींग डाल दी जाती है, तो वह भोजन हमारे पेट को नुकसान नहीं पहुंचाता।
दही
दही आपके पाचन तंत्र के लिए सबसे अच्छी चीज़ है, बशर्ते कि आपको लैक्टोज इन्टॉलरेंस न हो। ऐसे में जिन लोगों को यह समस्या नहीं है, उनके लिए दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स गैस, पेट फूलना और यहाँ तक कि एसिडिटी को भी कम करने में मदद कर सकते हैं। आप अपनी रोज़मर्रा की रेसिपीज़ में खट्टा क्रीम या मेयोनेज़ की जगह दही का इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि यह आपके भोजन में अच्छे बैक्टीरिया जोड़ने का एक स्मार्ट तरीका है। बेहतर होगा कि आप घर का बना दही खाएँ या फिर बाज़ार से ऐसा दही लें, जिसकी लेबल पर “लाइव एंड एक्टिव कल्चर्स” लिखा हो।

जीवनशैली में करें जरुरी बदलाव
गैस और अपच जैसी पेट की गंभीर बीमारी से बचने के लिए जीवनशैली में भी कुछ जरुरी बदलाव करने आवश्यक होते हैं।
- एक बार में बहुत अधिक भोजन करने के बजाय छोटे-छोटे और बार-बार भोजन करना पाचन को आसान बनाता है। धीरे-धीरे खाना और भोजन को अच्छी तरह चबाना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पाचन प्रक्रिया सहज हो जाती है और गैस बनने की संभावना कम हो जाती है।
- आहार में छोटे-छोटे बदलाव पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। अपने आहार में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें, क्योंकि ये पाचन सुधारने और कब्ज से बचाव में मदद करते हैं।
- तला हुआ और मसालेदार भोजन से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये अपच और गैस का कारण बन सकते हैं।
- गैस और अपच की समस्या से बचने के लिए कार्बोनेटेड पेय और शराब का सेवन करने से भी बचें, क्योंकि ये सूजन और गैस की समस्या को और बढ़ा सकते हैं।
- नियमित व्यायाम पाचन तंत्र को सक्रिय रखता है और गैस को बाहर निकालने में मदद करता है।
- तनाव पाचन पर नकारात्मक असर डाल सकता है, इसलिए योग, ध्यान और गहरी सांस लेने जैसे उपाय तनाव कम करने में उपयोगी हैं।
- आहार के साथ ही नींद भी हमारी पाचन स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। यही कारण है, कि पेट की बीमारी से पचने के लिए पर्याप्त नींद लेना भी ज़रूरी है। ऐसे में रोज़ाना 7-8 घंटे की नींद लेने की आदत डालें।
- धूम्रपान पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है और गैस व अपच का कारण बन सकता है, इसलिए समय रहते धूम्रपान छोड़ना बेहतर है।
- कुछ दवाएँ अपच का कारण बन सकती हैं, इसलिए यदि आप इन्हें नियमित रूप से लेते हैं, तो अपने डॉक्टर से सुरक्षित विकल्पों के बारे में ज़रूर सलाह लें।