Hepatitis A, B, and C: Causes, Symptoms & Prevention In Hindi : हेपेटाइटिस लिवर से जुङी एक खतरनाक बीमारी है। सामान्य तौर पर हेपेटाइटिस लिवर में सूजन को कहते हैं। यह सूजन किसी संक्रमण या चोट के प्रति शरीर की स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है। कई कारण लिवर को नुकसान पहुँचा सकते हैं और हेपेटाइटिस को ट्रिगर कर सकते हैं। कुछ मामलों में वायरल संक्रमण इसका प्रमुख कारण होते हैं, जबकि अन्य स्थितियों में लिवर को प्रभावित करने वाली बीमारियाँ, रसायनों, शराब या नशीली दवाओं जैसे विषाक्त पदार्थों का संपर्क भी इसका कारण बन सकता है। हेपेटाइटिस के लक्षण कभी अचानक प्रकट होते हैं और सामान्यत: छह महीने के भीतर ठीक हो जाते हैं, इसे एक्यूट हेपेटाइटिस कहा जाता है। इसके अलावा कुछ मामलों में यह लंबे समय तक बना रहता है और धीरे-धीरे लिवर की स्थिति बिगड़ती जाती है, जिसे क्रोनिक हेपेटाइटिस कहते हैं। हेपेटाइटिस के भी प्रकार होते हैं, जिनकी स्थिति, कारण और लक्षण लगभग अलग ही होते हैं। इस आर्टिकल में हम हेपेटाइटिस के सभी प्रकारों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

हेपेटाइटिस ए
हेपेटाइटिस ए एक वायरल संक्रमण है, जो लिवर को प्रभावित करता है। हेपेटाइटिस ए वायरस एच.ए.वी के कारण होता है। यह संक्रमण लिवर में सूजन यानि हेपेटाइटिस पैदा करता है, जिससे हल्के लक्षण कई हफ़्तों से लेकर लगभग दो महीने तक बने रह सकते हैं। आमतौर पर यह बीमारी बिना किसी विशेष इलाज के अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है, कि यह बेहद संक्रामक होती है। यह संक्रमित व्यक्ति के नज़दीकी संपर्क, दूषित भोजन या पानी के सेवन के माध्यम से आसानी से फैल सकती है। यही कारण है, कि संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता और साफ-सुथरा खानपान बनाए रखना बहुत ज़रूरी है।
हेपेटाइटिस ए के लक्षण
हेपेटाइटिस ए के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के कुछ हफ़्तों बाद प्रकट होते हैं, लेकिन हर संक्रमित व्यक्ति में ये लक्षण दिखें यह ज़रूरी नहीं है। लक्षणों की तीव्रता हल्की से गंभीर तक हो सकती है और कई बार ये कुछ ही हफ़्तों में ठीक हो जाते हैं, जबकि कुछ मामलों में कई महीनों तक बने रह सकते हैं। सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं।
- असामान्य थकान और कमजोरी
- अचानक मतली, उल्टी और दस्त
- पेट के जिस हिस्से में लिवर होता है, उस जगह पर दर्द या बेचैनी
- मिट्टी या भूरे रंग का मल
- भूख में कमी
- हल्का बुखार
- गहरे रंग का मूत्र
- जोड़ों का दर्द
- त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ना
हेपेटाइटिस ए के कारण
हेपेटाइटिस ए वायरस (HAV) मुख्य रूप से फीकल-ओरल मार्ग से फैलता है, यानी संक्रमित व्यक्ति के मल के अंश अगर भोजन या पानी में मिल जाते हैं, तो यह संक्रमण दूसरों तक पहुँच सकता है। इसके प्रमुख कारण इस प्रकार हैं।
- दूषित भोजन और पानी हेपेटाइटिस ए का सबसे आम प्रसार का तरीका है।
- संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित पानी या भोजन, जैसे बिना पके फल, सब्ज़ियां या बर्फ इसके स्रोत हो सकते हैं।
- व्यक्ति से व्यक्ति संपर्क बनाने से हेपेटाइटिस ए बहुत तेजी से फैलता है।
- यदि कोई संक्रमित व्यक्ति शौचालय का उपयोग करने के बाद हाथ अच्छी तरह से नहीं धोता और फिर दूसरों के संपर्क में आता है या भोजन तैयार करता है, तो वायरस आसानी से फैल सकता है।
- यौन संपर्क भी हेपेटाइटिस ए का कारण बन सकता है। खासकर गुदा या मौखिक संपर्क हेपेटाइटिस ए के प्रसार का प्रमुख कारण है।
- जहाँ साफ पानी और स्वच्छता की व्यवस्था नहीं होती, वहाँ आमतौर पर हेपेटाइटिस ए का खतरा अधिक होता है।
हेपेटाइटिस ए की रोकथाम के उपाय
- हेपेटाइटिस ए की रोकथाम के लिए सबसे प्रभावी उपाय टीकाकरण है। यह सुरक्षित और प्रभावी टीका छह महीने के अंतराल पर दो खुराकों में दिया जाता है।
- अच्छी स्वच्छता और सुरक्षित भोजन-पानी का सेवन करना बेहद ज़रूरी है। बाथरूम इस्तेमाल करने के बाद, डायपर बदलने के बाद और भोजन से पहले हाथों को साबुन और पानी से धोना संक्रमण से बचाव में सहायक है।
- भोजन और पानी के मामले में सावधानी बरतें। कच्चे या अधपके मांस और मछली से बचें, सड़क पर बिकने वाले असुरक्षित भोजन का सेवन न करें।
- केवल बोतलबंद या उबला हुआ पानी पिएं और कच्चे फल-सब्ज़ियों को स्वयं छीलकर खाएं और साथ ही पेय पदार्थों में बर्फ डालने से भी परहेज करें।
- यौन संबंधों में भी सावधानी आवश्यक है, विशेषकर ओरल-एनाल सेक्स के दौरान।
- हेपेटाइटिस ए से पीड़ित व्यक्तियों को दूसरों के लिए खाना बनाने से बचना चाहिए। अगर आप ऐसे क्षेत्र में यात्रा कर रहे हैं, जहां हेपेटाइटिस ए का खतरा अधिक है, तो यात्रा से पहले डॉक्टर से टीकाकरण की सलाह लें और वहां भी केवल सुरक्षित पानी व अच्छी तरह पका हुआ भोजन ही ग्रहण करें।

हेपेटाइटिस बी
हेपेटाइटिस बी एक गंभीर यकृत संक्रमण है, जो हेपेटाइटिस बी वायरस एच.बी.वी के कारण होता है। अधिकांश मामलों में यह अल्पकालिक यानी तीव्र संक्रमण के रूप में सामने आता है, जो छह महीने से कम समय तक रहता है। हालांकि, कुछ लोगों में यह संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है और इसे दीर्घकालिक हेपेटाइटिस बी कहा जाता है। दीर्घकालिक संक्रमण से यकृत विफलता, यकृत कैंसर और सिरोसिस जैसी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। अधिकांश वयस्कों में ये देखा जाता है, कि लक्षण गंभीर होने पर भी हेपेटाइटिस बी पूरी तरह ठीक हो जाता है। वहीं शिशुओं और छोटे बच्चों में दीर्घकालिक संक्रमण विकसित होने की संभावना कहीं अधिक होती है।
हेपेटाइटिस बी के लक्षण
तीव्र हेपेटाइटिस बी के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। आमतौर पर संक्रमण के लगभग 1 से 4 महीने बाद ये लक्षण प्रकट होते हैं, हालांकि कुछ मामलों में संक्रमण के केवल दो सप्ताह बाद भी लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई बार खासकर छोटे बच्चों में तीव्र या दीर्घकालिक हेपेटाइटिस बी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। हेपेटाइटिस बी के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं।
- पेट में दर्द और पेट खराब होना।
- गहरे रंग का मूत्र।
- बुखार और जोड़ों का दर्द।
- भूख कम लगना और कुछ खाने का मन न करना।
- जी मिचलाना या उल्टी होना।
- कमजोरी और अत्यधिक थकान महसूस होना।
- कई रोगियों में पीलिया के लक्षण भी दिखाई देते हैं, जिसमें आँखों और त्वचा के सफेद हिस्से पीले पङ जाते हैं।
हेपेटाइटिस बी के कारण
- हेपेटाइटिस बी कई तरीकों से फैल सकता है, जिनमें सबसे आम कारण संक्रमित व्यक्ति के साथ बिना सुरक्षा के यौन संबंध बनाना है। इस दौरान वायरस संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य या योनि स्राव के माध्यम से आसानी से फैल सकता है।
- संक्रमित सुई या सिरिंज का साझा उपयोग, विशेष रूप से अवैध ड्रग्स इंजेक्ट करने के दौरान हेपेटाइटिस बी के संक्रमण का एक प्रमुख कारण है।
- गर्भवती महिलाएँ जो हेपेटाइटिस बी से पीड़ित होती हैं, वे प्रसव के समय अपने शिशुओं को यह वायरस संक्रमित कर सकती हैं।
- स्वास्थ्यकर्मियों और रक्त के संपर्क में आने वाले लोगों के लिए आकस्मिक सुई चुभना भी एक गंभीर जोखिम होता है।
- असुरक्षित चिकित्सा या दंत चिकित्सा उपकरणों का उपयोग करने से भी हेपेटाइटिस बी का संक्रमण फैल सकता है।
- निजी वस्तुओं को साझा करने जैसे, रेज़र, टूथब्रश या नेल कटर से भी संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है।
हेपेटाइटिस बी की रोकथाम के उपाय
- टीकाकरण हेपेटाइटिस बी का टीका सुरक्षित और प्रभावी है।
- सभी शिशुओं को जन्म के समय पहली खुराक दी जानी चाहिए और 6 से 18 महीने तक पूरी टीकाकरण श्रृंखला पूरी कर लेनी चाहिए।
- स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों और संक्रमण के उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों को भी टीकाकरण करवाना चाहिए।
- सुरक्षित यौन संबंध। संबंध बनाते समय कंडोम का प्रयोग करके संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- संक्रमित रक्त या शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से बचें।
- सुई, रेज़र, टूथब्रश जैसी निजी वस्तुओं को साझा न करें।
- स्वच्छता का खास ध्यान रखें। नियमित रूप से हाथ धोना संक्रमण से बचाव में सहायक है। विशेष रूप से खाने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद हाथ धोना ज़रूरी है।
- गर्भवती माताओं को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। अगर मां हेपेटाइटिस बी से संक्रमित है, तो नवजात शिशु को जन्म के 12 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस बी का टीका जरुर लगाना चाहिए।
- केवल स्वच्छ और कीटाणुरहित उपकरणों से टैटू या पियर्सिंग करवाएं।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न लें।
- तनाव कम करने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद लें।
हेपेटाइटिस सी
हेपेटाइटिस सी एक गंभीर लिवर रोग है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस एच.सी.वीके कारण होता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित रक्त के संपर्क में आने से फैलता है। आमतौर पर हेपेटाइटिस सी से पीड़ित लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिसके कारण कई बार लंबे समय तक व्यक्ति को पता ही नहीं चलता, कि वह संक्रमित है। इसका पता केवल स्क्रीनिंग टेस्ट के माध्यम से लगाया जा सकता है। यह वायरस लिवर में सूजन पैदा करता है और धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुँचाता है। यदि समय पर इलाज न किया जाए, तो यह संक्रमण क्रोनिक लिवर रोग में बदल सकता है और सिरोसिस, लिवर फेलियर या लिवर कैंसर जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। 1992 से पहले रक्त आधान और अंग प्रत्यारोपण के लिए हेपेटाइटिस सी की स्क्रीनिंग नहीं होती थी, जिससे संक्रमण का खतरा अधिक था।अच्छी बात ये है, कि आधुनिक चिकित्सा में उपलब्ध नई दवाएँ हेपेटाइटिस सी का प्रभावी इलाज कर सकती हैं और संक्रमण को पूरी तरह समाप्त करने में मदद करती हैं।
हेपेटाइटिस सी के लक्षण
अधिकांश लोगों में हेपेटाइटिस सी के लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन जब लक्षण प्रकट होते हैं, तो वे हल्के से लेकर गंभीर हो सकते हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं।
- बुखार
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- जी मिचलाना और उल्टी
- भूख में कमी
- पीलिया
- पेट में दर्द या बेचैनी
- लगातार थकान
- गहरे रंग का मूत्र
- मिट्टी या हल्के रंग का मल त्याग।
इसके साथ ही यह ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है, कि कई बार हेपेटाइटिस सी लंबे समय तक साइलेंट रहता है, यानि इसका कोई लक्षण नहीं दिखाई देता। ऐसे में ये धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुँचाता रहता है।
हेपेटाइटिस सी के कारण
हेपेटाइटिस सी वायरस एच.सी.वी के कारण होने वाली एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित रक्त के संपर्क में आने से फैलती है।
- इसका सबसे आम कारण संक्रमित रक्त का संपर्क है। नशीली दवाओं का इंजेक्शन लगाने वाले लोग अक्सर सुई और सीरिंज साझा करते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- असुरक्षित यौन संबंध, विशेषकर पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों में, भी संक्रमण के खतरे को बढ़ाते हैं।
- स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को सुई की चोटों से यह संक्रमण हो सकता है।
- गर्भावस्था के दौरान संक्रमित मां अपने बच्चे को वायरस संचारित कर सकती है।
- व्यक्तिगत वस्तुओं, जैसे रेज़र और टूथब्रश का साझा करना भी संक्रमण का कारण बन सकता है।

हेपेटाइटिस सी की रोकथाम के उपाय
सबसे पहले जान लें, कि हेपेटाइटिस ए और बी के विपरीत, अभी तक हेपेटाइटिस सी के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है। इस संक्रमण से बचाव के लिए केवल सावधानियां सबसे प्रभावी तरीका हैं।
- संक्रमित रक्त के संपर्क से बचें।
- किसी भी तरह की सुई, सिरिंज, फिल्टर, चम्मच, स्वाब और टर्निकेट साझा न करें।
- ड्रग्स इंजेक्ट करने वाले लोगों में यह संक्रमण का सबसे बड़ा कारण है।
- टैटू और पियर्सिंग कराते समय खास ध्यान रखें। अगर करवाना ज़रूरी हो, तो केवल स्वच्छ और मान्यता प्राप्त केंद्र पर जाएं और कराने से पहले सुनिश्चित करें, कि सभी उपकरण स्टरलाइज़्ड या डिस्पोजेबल हों।
- सुरक्षित यौन संबंध का ध्यान रखें। कंडोम का प्रयोग करें, खासकर गुदा या मैथुन के समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।
- व्यक्तिगत वस्तुएं जैसे, टूथब्रश, रेज़र, नाखून कटर या अन्य वस्तुएं जिनसे खून का संपर्क हो सकता है, वह वस्तुएं साझा न करें।
- सुई और तेज औजारों से होने वाली चोट से बचाव करें।
- मरीज के रक्त और शारीरिक तरल पदार्थों को संभालते समय सुरक्षा उपकरणों जैसे गल्व्स या मास्क का उपयोग करें।
- नशीली दवाओं से परहेज़ करें, साथ ही इंजेक्शन द्वारा ड्रग्स का सेवन न करें।
- इसके साथ ही सबसे जरुरी बात ये है, कि हेपेटाइटिस सी से जुङी गलतफहमियों से दूर रहें। हेपेटाइटिस सी लार, खाँसी, छींक, गले लगाने, बर्तन साझा करने या सामान्य संपर्क से नहीं फैलता।