International Museum Day 2025 In Hindi : हर साल 18 मई को पूरे विश्व में ‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ (International Museum Day 2025) मनाया जाता है। ये दिन हमें याद दिलाता है कि संग्रहालय सिर्फ पुरानी चीजो का भंडार नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर और इतिहास को समझने का जरिया हैं। आज की पीढ़ी इन संग्रहालयों के जरिए अतीत से जुड़ती है, और आने वाली पीढ़ियां आज के समय को इन्हीं के माध्यम से जानेंगी।
इस दिन को मनाने के लिए दुनिया भर में विभिन्न कार्यक्रम, वर्कशॉप और विशेष प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाती हैं। भारत में भी कई संग्रहालय इस अवसर पर विशेष गतिविधियाँ करते हैं, ताकि लोग अधिक से अधिक जुड़ें और इतिहास को करीब से समझ सकें।
‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ ना केवल संग्रहालयों के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे ये संस्थान समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। तो आइए इस ब्लॉग में जानते हैं ‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ (International Museum Day 2025) के इतिहास, महत्व और थीम के बारे में सारी डिटेल्स –
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संग्रहालय हमारे लिए क्यों हैं जरुरी?
संग्रहालय सिर्फ पुरानी चीजें देखने की जगह नहीं होतीं, बल्कि ये हमारे इतिहास, संस्कृति और धरोहर को सहेजकर रखने का काम करते हैं। जब भी आप किसी म्यूज़ियम में जाते हैं, तो वहां रखी हर एक चीज़ आपको एक कहानी सुनाती है – राजा-महाराजाओं की, पुरानी सभ्यताओं की, या फिर किसी खास युद्ध की.
संग्रहालय कई तरह के होते हैं। जैसे अगर आपको पुराने महलों और मूर्तियों में दिलचस्पी है, तो पुरातत्व संग्रहालय आपके लिए परफेक्ट है। वहीं, अगर आप जनजातियों की संस्कृति और रहन-सहन के बारे में जानना चाहते हैं, तो जनजाति संग्रहालय आपको उस दुनिया से रूबरू कराएगा.
कुछ म्यूज़ियम खास तौर पर ट्रेनों के लिए बने होते हैं – जैसे रेल संग्रहालय, जहां आप भारत की रेलवे की पूरी कहानी देख सकते हैं। और अगर आपको देश की सुरक्षा और आर्मी से जुड़ी चीजों में इंटरेस्ट है, तो रक्षा संग्रहालय जरूर देखना चाहिए।
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‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ का इतिहास
आपको बता दें कि सबसे पहली बार साल 1977 में International Council of Museums (ICOM) ने ‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ (International Museum Day 2025) को मनाने की पहल की थी। इसका मकसद ये था कि लोग इतिहास, कला और संस्कृति से जुड़ी चीजों में ज्यादा दिलचस्पी लें और म्यूजियम की अहमियत को समझें।
इसके बाद साल 1983 में United Nations ने भी इस आइडिया को सपोर्ट करते हुए इस पर एक प्रस्ताव पास किया। तभी से हर साल 18 मई को दुनियाभर में म्यूजियम डे मनाया जाने लगा। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। साल 1992 में ICOM ने एक और बड़ा कदम उठाया – अब हर साल इस दिन को एक खास थीम के साथ मनाया जाने लगा, ताकि अलग-अलग पहलुओं को सामने लाया जा सके। इससे लोगों को म्यूजियम्स के नए रूप और उनके बदलते रोल के बारे में भी समझने का मौका मिला।
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भारत के लिए जरूरी है ‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’
गौरतलब है कि जब भी हम किसी म्यूजियम यानी संग्रहालय में जाते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे हम टाइम मशीन से पुराने दौर में पहुंच गए हों। वहां रखी हर चीज—चाहे वो पुराने सिक्के हों, राजा-महाराजाओं की तलवारें हों या फिर पेंटिंग्स—हमारे इतिहास की एक झलक दिखाती हैं।
‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ (International Museum Day 2025) का मकसद भी कुछ ऐसा ही है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है लोगों को हमारे इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के बारे में जागरूक करना। आज अगर हम सैकड़ों साल पुरानी सभ्यताओं की झलक देख पाते हैं, तो उसका श्रेय संग्रहालयों को ही जाता है। ये सिर्फ पुरानी चीजों को दिखाने की जगह नहीं हैं, बल्कि ये हमें बताते हैं कि हमारा अतीत कितना समृद्ध रहा है। दुनियाभर में अलग-अलग सभ्यताओं और परंपराओं को संरक्षित करने में म्यूजियम्स का बड़ा रोल होता है।

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‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ 2025 की थीम
आपको बता दें कि हर साल ‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ (International Museum Day 2025) को सेलिब्रेट करने के लिए एक खास थीम निर्धारित की जाती है, जो संग्रहालयों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके सामाजिक योगदान को दर्शाता है। ऐसे में साल 2025 में इस दिवस का थीम है – “The Future of Museums in Rapidly Changing Communities”। इसका मतलब है कि कैसे संग्रहालय तेजी से बदलते समाज में अपनी भूमिका निभा सकते हैं और नई पीढ़ियों के लिए प्रासंगिक बने रह सकते हैं।
इस थीम के तहत, संग्रहालयों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे तकनीकी, सामाजिक और पर्यावरणीय बदलावों के बीच खुद को कैसे ढालें और समुदायों के साथ मिलकर कैसे काम करें। यह एक अवसर है यह सोचने का कि संग्रहालय केवल अतीत की कहानियाँ नहीं बताते, बल्कि वे भविष्य की दिशा भी तय कर सकते हैं।