National Panchayati Raj Day 2025 In Hindi : पंचायती राज असल में स्थानीय स्तर पर शासन की एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें गांव से लेकर जिले तक के लोगों को अपनी बात कहने और निर्णय लेने का अधिकार है। तीन स्तर होते हैं – सबसे नीचे ग्राम पंचायत, फिर सबसे नीचे पंचायत (ब्लॉक स्तर) और सबसे ऊपर जिला परिषद।
आम भाषा में कहें तो पंचायती राज भारत में स्थानीय शासन की एक त्रि-स्तरीय प्रणाली (Three-Tier System) है, जिसमें ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायतें, ब्लॉक स्तर पर पंचायत समितियाँ और जिला स्तर पर जिला परिषदें शामिल हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर शक्ति और संसाधनों का विकेंद्रीकरण करना और सहभागी लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
शासन के इसी व्यवस्था या प्रणाली को महत्व देने के लिए और इसके महत्व को लोगों के बीच समझाने के लिए हर साल 24 अप्रैल को देशभर में ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ (National Panchayati Raj Day) मनाया जाता है। यह दिवस हर साल 24 अप्रैल को उस ऐतिहासिक दिन की याद में मनाया जाता है जब संविधान (73वां संशोधन) अधिनियम 1992 लागू हुआ था। यह अधिनियम पंचायती राज संस्थानों (PRI) को संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है और उन्हें जमीनी स्तर पर स्वशासन संस्थानों के रूप में कार्य करने का अधिकार देता है।

‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ का इतिहास
पंचायती राज के इतिहास की बात की जाए तो सबसे पहले साल 1993 में भारत का 73वां संविधान संशोधन अधिनियम लागू हुआ। ये कानून साल 1992 में संसद से पास हुआ था और फिर 24 अप्रैल 1993 को राष्ट्रपति की मंज़ूरी के साथ पूरे देश में लागू कर दिया गया। इसी के साथ पंचायतों को एक संवैधानिक पहचान मिल गई।
भले हीं पंचायती राज का नियम भारत में 1992 में पास हुआ, लेकिन भारत में गांवों की अपनी सरकार का आइडिया नया नहीं है। पुराने ज़माने से ही लोग ग्राम सभाओं के जरिए अपने गांव की समस्याओं का हल खुद निकालते आए हैं। इसके बावजूद भारत में मॉडर्न पंचायती राज की शुरुआत साल 1957 में हुई जब बलवंत राय मेहता समिति बनाई गई। इस समिति ने एक तीन-स्तरीय प्रणाली की सिफारिश की – जिसमें ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद हो।
शुरूआत में ये सिस्टम कुछ राज्यों में लागू तो हुआ, लेकिन इनके पास न तो पक्की कानूनी ताकत थी और न ही जरूरी फंडिंग। इसलिए उस समय पंचायतें बहुत असरदार नहीं बन पाईं। लेकिन फिर आया साल 1992, जब संविधान में संशोधन करते हुए पंचायतों को पूरी ताकत दी गई। अब ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत, ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति और जिला स्तर पर जिला परिषद बनने लगे। इसके साथ ही महिलाओं, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए भी पंचायतों में सीटें रिजर्व कर दी गईं, ताकि हर वर्ग की भागीदारी हो।

‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ का महत्व
भारत में ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ (National Panchayati Raj Day) का एक अलग ही महत्व है। ये दिन सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस बदलाव की याद दिलाता है जब गांवों को उनकी खुद की सरकार मिली और एक संवैधानिक दर्जा मिला। पंचायती राज प्रणाली हमारे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का ऐसा हिस्सा है, जो सीधे तौर पर आम लोगों को सत्ता से जोड़ता है।
इस सिस्टम का मकसद है कि फैसला लेने की ताकत सिर्फ बड़े शहरों या नेताओं के हाथ में न रहे, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचे। इससे न सिर्फ लोकल लेवल पर डेवलपमेंट होता है, बल्कि लोग खुद भी अपने गांव की प्रगति में भागीदार बनते हैं। जब गांव के लोग अपने मसलों पर खुद फैसला लेते हैं, तो स्वशासन और जवाबदेही दोनों मजबूत होते हैं।
हर साल इस दिवस (National Panchayati Raj Day) को मनाने का एक मकसद लोगों को पंचायतों के रोल के बारे में बताना होता है कि कैसे ये सिस्टम समावेशी विकास और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देता है। इस मौके पर देशभर में कई तरह के प्रोग्राम होते हैं, जिसमें सेमिनार, वर्कशॉप, रैलियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और एग्ज़िबिशन जैसे कई अन्य कार्यक्रम शामिल हैं। इन सभी कार्यक्रम का मकसद लोगों को दिखाना है कि पंचायतें अपने गांवों के लिए क्या-क्या अच्छा काम कर रही हैं।
लेकिन इस दिन को मनाने का असली मतलब है – लोकतंत्र को जड़ से मज़बूत करना और ये यकीन दिलाना कि बदलाव नीचे से शुरू होता है। गौरतलब है कि जब गांव मजबूत होंगे, तभी देश भी आगे बढ़ेगा। इसलिए पंचायती राज का होना हमारे देश में बेहद जरुरी है।
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क्यों मनाते हैं ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’?
‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ (National Panchayati Raj Day) विकेंद्रीकृत सत्ता की शुरुआत को चिह्नित करने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में उनके अनुकरणीय कार्यों के लिए पंचायतों को मान्यता देने के लिए मनाया जाता है। इसके साथ हीं यह दिवस पीआरआई (PRI) की उपलब्धियों का जश्न मनाने और सहभागी लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में स्थानीय शासन के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

कैसे मनाते हैं ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’?
24 अप्रैल को पूरे देश में ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ (National Panchayati Raj Day) बड़े ही जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन का मकसद होता है गांवों के विकास में पंचायतों यानी PRIs (Panchayati Raj Institutions) की अहमियत को समझना और लोगों को इसके बारे में जागरूक करना। इस दिन को कई तरीकों से देशभर में सेलिब्रेट किया जाता है –
- इस मौके पर अलग-अलग जगहों पर सेमिनार और वर्कशॉप रखे जाते हैं, जहां पंचायत से जुड़े लोग मिलकर उन चुनौतियों पर बात करते हैं जो उन्हें अपने काम में आती हैं। साथ ही, इन चुनौतियों से निपटने के लिए क्या बेहतर तरीके हो सकते हैं, उस पर भी चर्चा होती है।
- ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ (National Panchayati Raj Day) के दिन कई जगहों पर PRI के सदस्य रैलियां और जुलूस निकालते हैं, जिसमें लोगों को बताया जाता है कि पंचायतें किस तरह से हेल्थ, एजुकेशन और साफ-सफाई जैसे जरूरी मुद्दों पर काम कर रही हैं। इससे न सिर्फ लोगों के बीच जागरूकता बढ़ती है, बल्कि लोगों को ये भी दिखता है कि उनकी पंचायतें उनके लिए कितनी मेहनत कर रही हैं।
- इस दिन गांवों की संस्कृति और विविधता का भी जश्न मनाया जाता है। वहीं कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, जिनमें लोक नृत्य, पारंपरिक गाने और दूसरी रंग-बिरंगी प्रस्तुतियां शामिल होती हैं। ये इवेंट्स ना सिर्फ लोगों का मनोरंजन करते हैं, बल्कि गांवों के रिच कल्चर को भी उजागर करते हैं।
- इसके अलावा ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ (National Panchayati Raj Day) के दिन प्रदर्शनी भी लगाई जाती है, जिनमें दिखाया जाता है कि पंचायतों ने गांवों में क्या-क्या अच्छा काम किया है। इस दिन लोगों को इस बात ये अवगत करवाया जाता है कि पंचायतों द्वारा उनके गांव में किसी जगह पीने का साफ पानी पहुंचाया गया, तो कहीं स्कूल की हालत सुधारी गई – इन सबको इन प्रदर्शनी में शेयर किया जाता है।
- इसके साथ हीं इस खास दिन पर अपने कार्यकाल के दौरान सबसे अच्छा काम करने वाली पंचायतों और उनके मेंबर्स को अवॉर्ड्स भी दिए जाते हैं। इससे बाकी पंचायतों को भी मोटिवेशन मिलता है कि वो भी कुछ अलग और अच्छा करें।
‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ 2025 की थीम
आपको बता दें कि हर साल ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ (National Panchayati Raj Day) को मनाने के लिए एक थीम निर्धारित की जाती है, जिसका उद्देश्य लोगों को पीआरआई (PRI) की उपलब्धियों का जश्न मनाने और सहभागी लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में स्थानीय शासन के महत्व के बारे में जागरूक बनाना होता है।
फिलहाल ‘राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस’ 2025 के लिए आधिकारिक थीम की घोषणा पंचायती राज मंत्रालय द्वारा अभी तक नहीं की गई है, लेकिन थीम आमतौर पर भागीदारीपूर्ण शासन, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और ग्राम-स्तरीय प्रशासन में डिजिटल परिवर्तन को बढ़ाने पर केंद्रित होती है।