Doctors Shocked: New Drug-Resistant Typhoid Strain Discovered In Hindi : मानव शरीर में जब भी रोगों की बात आती है, तब संक्रामक रोगों को प्रमुख रोगों में से एक माना जाता है। सभी संक्रामक रोगों में भी टाइफाइड बुखार को बेहद खतरनाक रोग माना जाता है, जो साल्मोनेला टाइफी (S. Typhi) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बीमारी प्राचीन समय से ही मानव स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। दूषित भोजन और पानी इसके प्रमुख स्रोत हैं। टाइफाइड के लक्षण साधारण बुखार जैसे लग सकते हैं, लेकिन अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
आज जब चिकित्सा विज्ञान ने एंटीबायोटिक दवाओं के जरिए इस पर नियंत्रण पाने में सफलता पाई है, तब नए दवा प्रतिरोधी टाइफाइड स्ट्रेन, जिसे एक्सडीआर टाइफाइड के नाम से भी जाना जाता है, इसका उभरना विश्वभर के लिए गंभीर खतरे के रूप में सामने आया है। इस आर्टिकल में हम टाइफाइड बीमारी के इस प्रकार के बारे में विस्तार से चर्चा करने वाले हैं, जो इन दिनों लोगों के बीच तेजी से फैलने वाली बीमारी का रुप बना हुआ है।

क्या है टाइफाइड ?
टाइफाइड बुखार मुख्य रुप से आंतों को संक्रमित करता है। इस कारण इसे आंत्र ज्वर भी कहा जाता है। यह बीमारी शरीर में बैक्टीरिया के प्रवेश और उनके बढ़ने से उत्पन्न होती है। बहुत कम लोग जानते हैं, कि इसके समानांतर एक अन्य रोग भी होता है, जिसे पैराटाइफाइड बुखार कहते हैं। यह साल्मोनेला पैराटाइफी (S. Paratyphi) के कारण होता है। पैराटाइफाइड के लक्षण टाइफाइड जैसे ही होते हैं, लेकिन यह अपेक्षाकृत हल्का माना जाता है। इसके साथ ही ये जान लें, कि S. Typhi और S. Paratyphi उन बैक्टीरिया से अलग हैं, जो सामान्य साल्मोनेलोसिस यानि खाद्य विषाक्तता का कारण बनते हैं।
टाइफाइड के लक्षण
वैसे तो टाइफाइड का सबसे प्रमुख लक्षण लंबे समय तक रहने वाला तेज बुखार है। इसके साथ ही इसके कुछ अन्य लक्षण भी होते हैं, जो इस प्रकार हैं।
- लगातार सिरदर्द और ठंड लगना।
- भूख में कमी।
- पेट में दर्द।
- छाती या पेट पर हल्के गुलाबी धब्बे, जिन्हें गुलाब के धब्बे नाम से जाना जाता है।
- लगातार खाँसी रहना।
- मांसपेशियों में दर्द होना।
- मतली होना और उल्टी आना।
- दस्त या कब्ज।
टाइफाइड के कारण
टाइफाइड एक संक्रामक रोग है, जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होता है। यह बैक्टीरिया संक्रमित व्यक्ति की आंतों में मौजूद रहते हैं और उनके मल या मूत्र के माध्यम से बाहर निकलकर जल और भोजन को दूषित कर देते हैं। इसके अलावा टाइफाइड फैलने के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं।
- दूषित भोजन और पानी का सेवन करना।
- संक्रमित व्यक्ति द्वारा हाथ न धोकर भोजन या सतहों को छूना।
- अपशिष्ट जल का पीने के पानी या खाद्य पदार्थों में मिल जाना।
- शौचालय के बाद हाथ न धोने से बैक्टीरिया सतहों जैसे दरवाजे के हैंडल, फोन आदि पर फैल जाते हैं और आगे संक्रमण का कारण बनते हैं ।
- अस्वच्छता और गंदे पानी से टाइफाइड का खतरा बढ जाता है।
दवा प्रतिरोध क्या है ?
जब कोई बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवा से मरने के बजाय जीवित रहकर और तेजी से बढ़ने लगता है, तो इसे दवा प्रतिरोध (Drug Resistance) कहा जाता है। इसका मतलब है, कि पहले जिन दवाओं से संक्रमण का सफलतापूर्वक इलाज किया जाता था, अब वे दवाएँ प्रभावी नहीं रहीं। ऐसे में संक्रमण का इलाज करना कठिन या कभी-कभी असंभव हो जाता है। टाइफाइड बुखार आज भी लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा है। एंटीबायोटिक दवाओं के आने से इस पर नियंत्रण पाया गया था, लेकिन दवा प्रतिरोधी स्ट्रेन ने स्थिति को फिर से गंभीर बना दिया है।
दवा प्रतिरोधी टाइफाइड क्या है ?
टाइफाइड बीमारी के बारे में अच्छी तरह जानने के बाद बात करते हैं, एक्सडीआर टाइफाइड यानि व्यापक दवा प्रतिरोधी टाइफाइड की। वैज्ञानिकों ने एक व्यापक दवा प्रतिरोधी (XDR) साल्मोनेला टाइफी स्ट्रेन की पहचान की है। यह स्ट्रेन उन पाँच प्रमुख एंटीबायोटिक दवाओं के वर्गों के प्रति भी प्रतिरोधी हो गया है, जिन्हें टाइफाइड के इलाज में उपयोग किया जाता है। इसका पहला प्रकोप 2016 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सामने आया। इस प्रकोप ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को गहराई से प्रभावित किया और उपचार की कठिनाइयों को उजागर किया।
अब यह खतरनाक स्ट्रेन सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। इसके मामले भारत, बांग्लादेश, नेपाल, फिलीपींस, इराक और ग्वाटेमाला जैसे देशों में भी दर्ज किए गए हैं। यह स्थिति इसके वैश्विक स्तर पर फैलने की संभावना को दर्शाती है। इस स्ट्रेन ने पहली और दूसरी पीढ़ी की एंटीबायोटिक दवाओं के साथ-साथ फ्लोरोक्विनोलोन तक के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है। इसका परिणाम ये हुआ, कि इस बीमारी के मरीजों का उपचार और कठिन हो गया है।
दवा प्रतिरोधी टाइफाइड की रोकथाम के उपाय
दवा प्रतिरोधी टाइफाइड से निपटने के लिए केवल दवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण आवश्यक है।
- टाइफाइड संयुग्म टीके (TCV)
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सभी आयु वर्गों के लिए टाइफाइड संयुग्म टीके (TCV) की सिफारिश की है। यह टीका एक्सडीआर स्ट्रेन के खिलाफ भी प्रभावी पाया गया है। उन क्षेत्रों में जहाँ टाइफाइड आम है, वहाँ टीकाकरण सबसे अहम कदम है।
- बेहतर WASH संसाधन
स्वच्छ जल, सुरक्षित शौचालय और उचित स्वच्छता की उपलब्धता (WASH – Water, Sanitation and Hygiene) ही टाइफाइड जैसे संक्रमणों को रोकने का सबसे स्थायी और व्यावहारिक तरीका है।
- निरंतर निगरानी और अनुसंधान
संक्रमण के नए पैटर्न और दवा प्रतिरोधी रोगजनकों की पहचान के लिए लगातार शोध और निगरानी जरूरी है। इससे भविष्य में होने वाले प्रकोपों को रोका जा सकता है।

दवा प्रतिरोधी टाइफाइड के लिए उपचार
टाइफाइड बुखार का इलाज लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता रहा है, लेकिन अब दवा-प्रतिरोधी टाइफाइड (Drug-Resistant Typhoid) के मामले बढ़ रहे हैं, जिससे उपचार में चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। इस स्थिति में डॉक्टरों को ऐसे एंटीबायोटिक दवाओं का चयन करना पड़ता है, जो अब भी प्रभावी हैं और जिनके प्रति बैक्टीरिया ने प्रतिरोध विकसित नहीं किया है।
- एज़िथ्रोमाइसिन (Azithromycin)
यह एक मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक है। इसे अक्सर मुंह से दिया जाता है, जिससे मरीजों के लिए इसका उपयोग आसान होता है। यह उन मामलों में विशेष रूप से प्रभावी है, जहाँ फ्लोरोक्विनोलोन और सेफ्ट्रिएक्सोन जैसी दवाएँ असर नहीं करतीं। वर्तमान समय में यह प्रतिरोधी टाइफाइड के उपचार के लिए प्राथमिक विकल्पों में से एक मानी जाती है।
- सेफ्ट्रिएक्सोन (Ceftriaxone)
यह तीसरी पीढ़ी का सेफलोस्पोरिन एंटीबायोटिक है। इसे अक्सर इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है। उन क्षेत्रों में जहाँ फ्लोरोक्विनोलोन अब प्रभावी नहीं हैं, वहाँ यह दवा उपयोगी मानी जाती है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं में भी इसका सुरक्षित रूप से उपयोग किया जा सकता है।
- कार्बापेनेम्स (Carbapenems)
ये एंटीबायोटिक दवाओं की सबसे शक्तिशाली श्रेणी में आते हैं। इनका उपयोग अत्यधिक गंभीर मामलों में किया जाता है, खासकर तब जब अन्य सभी एंटीबायोटिक दवाएँ असर करना बंद कर देती हैं। आमतौर पर अस्पताल में भर्ती मरीजों को इंट्रावेनस (IV) के रूप में दी जाती हैं। इनके उपयोग को अंतिम विकल्प माना जाता है, ताकि इन पर भी जल्दी प्रतिरोध विकसित न हो।
4. प्रारंभिक एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग
जब मरीज में दवा-प्रतिरोधी टाइफाइड का संदेह होता है, तो डॉक्टर सबसे पहले संवेदनशीलता परीक्षण (Antibiotic Sensitivity Test) कराते हैं। इस परीक्षण से एंटीबायोटिक दवा के उस विशेष जीवाणु के खिलाफ प्रभाव के बारे में पता चलता है और इसके आधार पर ही उपचार शुरू किया जाता है। कई मामलों में प्रारंभिक स्तर पर दी गई सही एंटीबायोटिक दवा ही संक्रमण को नियंत्रित कर सकती है।