Best Supplements & Probiotics for a Healthy Stomach In Hindi : प्रोबायोटिक्स वे जीवित सूक्ष्मजीव हैं, जो अगर सही मात्रा में लिए जाएं तो शरीर के लिए फायदेमंद साबित होते हैं। इन्हें अक्सर अच्छे बैक्टीरिया कहा जाता है, क्योंकि ये हमारे पाचन तंत्र को सपोर्ट करते हैं और आंतों का संतुलन बनाए रखते हैं। प्रोबायोटिक्स का सबसे बड़ा फायदा यह है, कि ये पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से पचाने और अवशोषित करने में मदद करते हैं। प्रोबायोटिक्स के हर स्ट्रेन या प्रजाति के अपने अलग-अलग लाभ होते हैं, जैसे कोई स्ट्रेन पाचन सुधारने में असरदार होता है तो कोई इम्यूनिटी बढ़ाने या पेट फूलने की समस्या कम करने में मदद करता है।
प्रोबायोटिक्स प्राकृतिक रूप से आपके आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। अगर किसी कारण से आहार से पर्याप्त प्रोबायोटिक्स न मिल पाए, तो इन्हें कैप्सूल, टैबलेट या पाउडर के रूप में सप्लीमेंट की तरह भी लिया जा सकता है। कुल मिलाकर प्रोबायोटिक्स आहार का एक ऐसा विकल्प होते हैं, जिनके सेवन से हमें पेट से जुङी सभी समस्याओं से राहत मिलती है। इतना ही नहीं ये हमारी पाचन क्रिया और उससे जुङे सभी अंगों के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प होता है।
पेट के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक पूरक और प्रोबायोटिक्स (Supplements & Probiotics)
पेट हमारे शरीर के सबसे जरुरी अंगों में से एक होता है। अगर पेट स्वस्थ रहता है, तो हमारे शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है। वहीं पेट से जुङी कोई भी समस्या होने पर हमारा शरीर कई तरीकों से प्रभावित होता है। ऐसे में इसे स्वस्थ बनाने के लिए कुछ ऐसे खाद्द पदार्थों का सेवन आवश्यक होता है, जो इसे मजबूत और निरोगी बनाते हैं।
फाइबर
फाइबर हमारे आहार का वो हिस्सा है, जो सीधे तौर पर ऊर्जा तो नहीं देता, लेकिन पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। इसे आप पेट का सफाईकर्मी समझ सकते हैं, जो आंतों में जमी गंदगी को साफ करता है और भोजन को आसानी से पचने में मदद करता है। फल, सब्जियां और साबुत अनाज फाइबर के बेहतरीन स्रोत हैं। जब हम इन्हें नियमित रूप से खाते हैं, तो कब्ज की समस्या दूर रहती है और पेट हल्का महसूस होता है। फाइबर आंतों की गतिशीलता को सही रखता है और साथ ही शरीर से जहरीले कीटाणुओं को बाहर निकालने में मदद करता है। इतना ही नहीं फाइबर का एक और बड़ा फायदा ये है, कि यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है। इससे भूख कम लगती है और भोजन सीमित मात्रा में ही किया जाता है।
किण्वित खाद्द पदार्थ
अपने आहार में किण्वित खाद्य पदार्थों को शामिल करना आंत के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ये खाद्य पदार्थ प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स का बेहतरीन स्रोत होते हैं। प्रोबायोटिक्स असल में अच्छे बैक्टीरिया हैं, जो आंतों का संतुलन बनाए रखते हैं और पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। किमची, दही, केफिर और सॉकरक्राट जैसे फर्मेंटेड फूड्स खाने से पेट की समस्याएं जैसे गैस, अपच और कब्ज काफी हद तक कम हो सकती हैं। साथ ही ये रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बूस्ट करते हैं, क्योंकि आंत का स्वास्थ्य सीधे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ा हुआ है।
पत्तेदार सब्जियां
पत्तेदार साग जैसे पालक, केल और अन्य हरी सब्जियां पाचन को दुरुस्त रखने के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती हैं। इनका सेवन करने से न सिर्फ पेट हल्का और साफ रहता है बल्कि पूरे पाचन तंत्र की कार्यक्षमता बेहतर हो जाती है। इनके फायदे को अगर सरल भाषा में समझें तो पहला बड़ा लाभ है, कि ये फाइबर से भरपूर होते हैं। फाइबर आंतों की सफाई करता है और कब्ज जैसी समस्या को रोकता है। दूसरा फायदा यह है, कि इनमें मैग्नीशियम अच्छी मात्रा में होता है, जो आंतों की मांसपेशियों को रिलैक्स करता है और भोजन को आसानी से पाचन तंत्र से गुजरने में मदद करता है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है, कि ये स्वस्थ आंत बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देते हैं। यह अच्छे बैक्टीरिया पाचन को संतुलित रखते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाते हैं।
केफिर
केफिर दही जैसा ही एक डेयरी प्रोडक्ट है, लेकिन इसमें प्रोबायोटिक्स की मात्रा और भी ज्यादा होती है। इसमें 30 से भी अधिक प्रकार के लाभदायक बैक्टीरिया और यीस्ट पाए जाते हैं, जो आंतों को स्वस्थ रखने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। केफिर का स्वाद दही से थोड़ा खट्टा होता है और इसकी प्रकृति पतली होती है, इसलिए इसे पीने योग्य ड्रिंक की तरह लिया जाता है। इसे नियमित रूप से पीने से आंतों के अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन मजबूत होता है, जिससे कब्ज, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याएं दूर रहती हैं।
दही
दही सिर्फ खाने में स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि यह आपके पाचन तंत्र के लिए भी किसी औषधि से कम नहीं। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स यानी अच्छे बैक्टीरिया आंतों को स्वस्थ रखते हैं और पाचन क्रिया को सहज बनाते हैं। जब आंत में बैक्टीरिया का सही संतुलन रहता है तो अपच, गैस और पेट फूलने जैसी दिक्कतें काफी हद तक कम हो जाती हैं। पोषण विशेषज्ञ का मानना है, कि दही नियमित रूप से खाने से आंत का माइक्रोबायोम मजबूत होता है, जिससे शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर तरीके से होता है। साथ ही यह रोग प्रतिरोधक क्षमता का भी समर्थम करता है। दही का सेवन करने के तरीके होते हैं। इसे सीधा खाएं, रायता बनाएं, लस्सी पीएं या फिर फलों के साथ मिलाकर योगर्ट बना लें, हर रूप में यह पाचन और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद रहेगा।
साबुत अनाज
साबुत अनाज जैसे ओट्स, ब्राउन राइस और गेहूं की रोटी हमारे आहार के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और आंतों की सफाई करके कब्ज जैसी समस्या से बचाव करता है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार जब आप अपने आहार में फाइबर युक्त साबुत अनाज शामिल करते हैं, तो आपका पाचन बेहतर तरीके से काम करता है और पेट हल्का महसूस होता है।
इतना ही नहीं ये अनाज धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती और वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है। साबुत अनाज को अपने रोजमर्रा के खाने में शामिल करना भी बहुत आसान है। आप सुबह की शुरुआत एक गरमागरम कटोरी ओटमील से कर सकते हैं, दोपहर या रात को ब्राउन राइस खा सकते हैं या फिर गेहूं की रोटी के साथ सब्जी खा सकते हैं। इन छोटे-छोटे बदलावों से आपका पाचन तंत्र मजबूत होगा और समग्र आंत स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
फल
फल हमारे डाइट का सबसे आसान और स्वादिष्ट हिस्सा होते हैं। एक कुरकुरा सेब या रसदार जामुन न सिर्फ खाने में मजेदार लगते हैं, बल्कि आंतों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं। फलों में भरपूर एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो आंत को स्वस्थ रखते हैं और शरीर को बीमारियों से बचाते हैं। इसके साथ ही इनमें घुलनशील फाइबर और पर्याप्त मात्रा में पानी होता है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाव में मदद करता है। फलों की खासियत यह है, कि ये प्राकृतिक मिठास के साथ ढेर सारे फायदे भी देते हैं। मतलब जब आपको कुछ मीठा खाने का मन करे, तो मिठाई या जंक फूड की जगह एक सेब, संतरा, केला या जामुन का कटोरा खा लेना कहीं ज्यादा स्वस्थ विकल्प साबित होता है।
सॉकरौट
सॉकरौट असल में एक किण्वित गोभी है, जो यूरोपीय देशों में काफी लोकप्रिय है और अब भारत में भी धीरे-धीरे लोग इसे अपनाने लगे हैं। इसमें प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो आंतों के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। सॉकरौट पाचन को आसान बनाता है और पेट से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद करता है। इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया आंतों के स्वास्थ्य को मजबूत बनाते हैं, जिससे कब्ज और पेट फूलने जैसी दिक्कतों से राहत मिल सकती है।
अचार
अचार सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं होता, बल्कि सेहत के लिए भी कई फायदे लेकर आता है। खासतौर पर खट्टे अचार प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत होते हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक बैक्टीरिया आंतों को स्वस्थ रखते हैं और पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। जब सब्जियों या फलों को नमक और पानी में डालकर प्राकृतिक तरीके से फर्मेंट किया जाता है, तो उनमें अच्छे बैक्टीरिया विकसित हो जाते हैं। यही बैक्टीरिया आंत में जाकर गट माइक्रोबायोम को संतुलित करते हैं और कब्ज, गैस जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें, कि बाजार से मिलने वाले कई अचार केवल सिरका और प्रिज़र्वेटिव्स से बने होते हैं, जिनमें असली प्रोबायोटिक्स नहीं होते। ऐसे में प्रोबायोटिक्स का असली फायदा पाने के लिए घर का बना हुआ खट्टा अचार सबसे अच्छा विकल्प है।
टेम्पेह
टेम्पेह एक पारंपरिक इंडोनेशियाई फूड है, जो सोयाबीन से बनाया जाता है। यह असल में सोयाबीन को फर्मेंट करके तैयार किया जाता है और इसलिए इसमें भरपूर मात्रा में प्रोबायोटिक्स पाए जाते हैं। यही वजह है, कि इसे आंतों के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। टेम्पेह की खासियत यह है, कि इसमें प्रोटीन बहुत ज्यादा होता है, इसलिए इसे शाकाहारियों के लिए मीट का स्वस्थ विकल्प कहा जाता है। फर्मेंटेशन की वजह से टेम्पेह आसानी से पच जाता है और पेट को हल्का रखता है। यह आंतों के बैक्टीरिया को संतुलित करता है, जिससे पाचन मजबूत होता है।
कम्बुचा
कम्बुचा एक फर्मेंटेड टी ड्रिंक है, जो पिछले कुछ सालों में काफी प्रचलित हो गई है। यह चाय, शुगर और एक खास तरह के यीस्ट और बैक्टीरिया से बनाई जाती है। फर्मेंटेशन की वजह से इसमें प्रोबायोटिक्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो आंतों के लिए बेहद फायदेमंद हैं। कम्बुचा पीने से आंतों का स्वास्थ्य बेहतर होता है, क्योंकि इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पाचन को दुरुस्त रखते हैं और कब्ज या पेट फूलने जैसी दिक्कतों से राहत दिलाते हैं। खास बात यह है, कि इसका असर केवल पेट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आंत और दिमाग के बीच के कनेक्शन की वजह से यह मूड को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।