World Asthma Day 2025 In Hindi : अस्थमा आज के समय में एक ऐसी बीमारी बन गई है, जिससे लगभग हर 10 में से 8 लोग जूझ रहे हैं। ये बीमारी वर्तमान में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक में देखने को मिल रही है, जिसे देखते हुए इसके बारे में लोगों को जागरुक करना बेहद जरुरी हो गया है। ऐसे में इसी को ध्यान में रखते हुए हर साल मई के पहले मंगलवार को पूरे विश्व में ‘विश्व अस्थमा दिवस’ मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य मकसद लोगों में अस्थमा को लेकर जागरूकता फैलाना और सही इलाज के बारे में जानकारी देना है।
दरअसल, ‘विश्व अस्थमा दिवस’ एक ग्लोबल हेल्थ प्रोग्राम की तरह मनाया जाता है, जिसमें अलग-अलग देशों में हेल्थ ऑर्गनाइजेशन मिलकर काम करते हैं। इस साल 2025 में, ‘विश्व अस्थमा दिवस’ (World Asthma Day 2025) 6 मई यानी मंगलवार को मनाया जाएगा। इस मौके पर दुनियाभर के कई बड़े और छोटे संगठन एक साथ आकर इस गैर-संचारी (non-communicable) बीमारी से लड़ने के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम और कैंपेन चलाते हैं, ताकि बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को अस्थमा के सही प्रबंधन और बचाव के तरीके बताए जा सकें।
इस बीमारी के बारे में लोगों को जागरुक कर हर साल कई जानें बचाई जा सकती हैं, साथ हीं लोगों को ये जानकारी भी दी जा सकती है कि ये बीमारी किसी भी ग्रस्त लोगों को आसपास जाने से नहीं फैलती है। तो आइए इस खास दिन पर जानते हैं ‘विश्व अस्थमा दिवस’ के इतिहास, महत्व और थीम के बारे में सारी डिटेल्स –
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‘विश्व अस्थमा दिवस’ (WAD) का इतिहास
दरअसल, ‘विश्व अस्थमा दिवस’ (World Asthma Day 2025) का इतिहास भी काफी दिलचस्प है। इस दिन का आयोजन GINA (Global Initiative for Asthma) करती है, जिसका निर्माण साल 1993 में हुआ था और ये ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन’ यानी (WHO) का एक सहयोगी संगठन है। GINA सभी संसाधन देशों को व्यापक अस्थमा प्रबंधन कार्यक्रम विकसित करने और बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास करता है, जिससे वैश्विक मृत्यु दर और रुग्णता दर पर अंकुश लग सके।
GINA द्वारा सबसे पहली बार साल 1998 में ‘विश्व अस्थमा दिवस’ (World Asthma Day 2025) मनाया गया था, जब 35 से भी ज्यादा देशों ने इसमें हिस्सा लिया था। इस मौके को खास बनाने के लिए एक बड़ी मीटिंग भी हुई थी, जो बार्सिलोना, स्पेन में आयोजित हुई थी। तभी से उस समय से लेकर आज तक इस दिन को हर साल बेहद जोश के साथ वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है और इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती रही है। वर्तमान में ‘विश्व अस्थमा दिवस’ को दुनिया की सबसे बड़ी अस्थमा जागरूकता और एजुकेशन से जुड़ी एक्टिविटीज में गिना जाता है।
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‘विश्व अस्थमा दिवस’ 2025 की थीम
आपको बता दें कि हर साल ‘विश्व अस्थमा दिवस’ (World Asthma Day 2025) को सेलिब्रेट करने के लिए एक खास थीम निर्धारित की जाती है। ऐसे में साल 2025 में ‘विश्व अस्थमा दिवस’ की थीम है – “अस्थमा शिक्षा सशक्त बनाती है”। यह थीम अस्थमा से पीड़ित लोगों को उनकी बीमारी का इलाज कैसे करें और कब चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए, इस बारे में शिक्षित करने की आवश्यकता पर जोर देती है।
‘विश्व अस्थमा दिवस’ क्यों है जरुरी?
अस्थमा आज के समय में बच्चों और बड़ों दोनों के बीच सबसे आम पुरानी बीमारियों में से एक है। यह कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन जैसे-जैसे लाइफस्टाइल और पर्यावरण बदल रहे हैं, इसकी गंभीरता भी बढ़ती जा रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और कई दूसरी हेल्थ एजेंसियों के मुताबिक, अस्थमा को खासतौर पर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में गरीबी से जुड़ा एक बड़ा कारण और नतीजा दोनों माना जाता है। यानी गरीबी अस्थमा को बढ़ाती भी है और अस्थमा होने पर आर्थिक हालत और खराब हो सकती है।
अगर आंकड़ों की बात करें तो WHO के अनुसार, साल 2019 में पूरी दुनिया में करीब 26.2 करोड़ लोग अस्थमा से जूझ रहे थे। इतने बड़े मरीजों की संख्या के साथ ही, अस्थमा (World Asthma Day 2025) से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी डराता है। 2019 में ही लगभग 4.55 लाख लोगों की मौत अस्थमा से जुड़ी परेशानियों के कारण हुई थी।
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भारत में अस्थमा का प्रभाव
‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज रिपोर्ट’ यानी GBDR 2019 के मुताबिक, भारत में अस्थमा (World Asthma Day 2025) का बोझ दुनिया में सबसे ज्यादा और लगातार बढ़ता हुआ देखा गया है। अगर आंकड़ों की बात करें तो भारत में 3.4 करोड़ से भी ज्यादा लोग अस्थमा से पीड़ित हैं।
दुनिया भर की अस्थमा पीड़ित आबादी में भारत का योगदान सिर्फ 13% है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अस्थमा से होने वाली मौतों में भारत का योगदान करीब 42% है। यानी इलाज में कमी या सही मैनेजमेंट ना होने के कारण भारत में अस्थमा की गंभीरता काफी ज्यादा है।
भारत में अस्थमा (World Asthma Day 2025) से जूझ रहे लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लगातार चलने वाले लक्षण, लाइफ क्वालिटी में गिरावट और स्कूल या ऑफिस से बार-बार छुट्टी लेना उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है। ये परेशानियां न सिर्फ उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डालती हैं, बल्कि मानसिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करती हैं।
एक इंटरनेशनल रिसर्च जिसमें भारत, न्यूयॉर्क सिटी, स्पेन, तुर्की और बहरीन के वैज्ञानिक शामिल थे, उन्होंने पाया कि बच्चों में अस्थमा के इलाज और देखभाल को लेकर जागरूकता और सही प्रैक्टिस की काफी कमी है। रिसर्च का साफ नतीजा यही निकला कि बच्चों की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझने और स्कूल से उनकी अनुपस्थिति को कम करने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करना बहुत जरूरी है।
ऐसे प्रोग्राम बच्चों को न केवल उनकी बीमारी को समझने में मदद करेंगे, बल्कि उन्हें ज्यादा आत्मनिर्भर और स्कूल लाइफ में एक्टिव रहने में भी सपोर्ट करेंगे। ‘विश्व अस्थमा दिवस’ (World Asthma Day 2025) भी एकतरह से इसी मकसद के साथ वैश्विक स्तर पर काम करता है और लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरुक करता है।
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‘विश्व अस्थमा दिवस’ का महत्व
ऊपर दिए गए आंकड़ों से ये बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि अस्थमा (World Asthma Day 2025) भले ही कोई बहुत खतरनाक बीमारी ना लगे, लेकिन अगर इसका सही वक्त पर इलाज ना हो या इलाज में लापरवाही हो जाए तो यह जानलेवा भी बन सकती है।
इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र के ‘डेवलपमेंट के लिए 2030 एजेंडा’ और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की ‘गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए ग्लोबल एक्शन प्लान’ — दोनों में अस्थमा को एक प्राथमिकता वाली बीमारी के तौर पर शामिल किया गया है।
इन इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स के जरिए अस्थमा के सही डायग्नोसिस, बचाव और इलाज को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग स्ट्रैटेजीज पर तेजी से काम किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वक्त रहते सही इलाज मिल सके।

अस्थमा से कैसे करें बचाव?
देखा जाए तो अस्थमा (World Asthma Day 2025) की रोकथाम पूरी तरह से मुमकिन तो नहीं है, लेकिन कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। अगर सही समय पर सही कदम उठाए जाएं तो अस्थमा के अटैक और इसके बढ़ने के खतरे को कम किया जा सकता है। इसके लिए आपको नीचे दिए गए कुछ जरुरी बातों का ध्यान रखना होगा –
- सबसे जरूरी है कि आप उन चीजों से दूर रहें जो अस्थमा को ट्रिगर कर सकती हैं। जैसे कि वायु प्रदूषण, तेज ठंडी हवा या फिर तेज सुगंध (जैसे परफ्यूम या खुशबूदार मोमबत्तियां)। साथ हीं एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों, जैसे धूल, धुएं और धूपबत्ती या आतिशबाजी के धुएं से भी बचाव जरूरी है।
- अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति सर्दी या फ्लू से पीड़ित हो तो कोशिश करें कि उनसे थोड़ा दूरी बनाकर रखें, ताकि संक्रमण से बचा जा सके। इसके साथ हीं अपने घर और काम करने की जगह को हमेशा साफ-सुथरा और धूल-मिट्टी से मुक्त रखना भी बहुत जरूरी है।
- इसके अलावा कुछ वैक्सीनेशन जैसे निमोनिया और डिप्थीरिया के खिलाफ टीके लगवाना भी अस्थमा के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
ऐसे में कुल मिलाकर, थोड़ी सी सावधानी और समय पर सतर्कता आपको अस्थमा (World Asthma Day 2025) से बचाने में बड़ा रोल निभा सकती है। याद रखें जागरुकता हीं हमारी सुरक्षा की पूंजी है।